
नागपुर – बूटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इरोज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. साइबर ठगों के निशाने पर आ गई। शातिर साइबर अपराधियों ने कंपनी के नियमित मशीनरी सप्लायर का आधिकारिक ईमेल हैक कर उसके जरिए फर्जी बैंक विवरण भेजे और कंपनी से 34.50 लाख रुपये की एडवांस रकम अपने बताए खाते में ट्रांसफर करवा ली। ठगी का खुलासा होने के बाद कंपनी प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मामले में सीताबर्डी पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, इरोज इंफ्रास्ट्रक्चर के एचआर मैनेजर अभय सीताराम पांडे (34) ने शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी अपने कामकाज के लिए करीब 1.15 करोड़ रुपये की रोल-फॉर्मिंग मशीन खरीदने की प्रक्रिया में थी। इसके लिए कंपनी ने राजकोट स्थित अपने नियमित वेंडर डिवाइन मशीन्स प्रा.लि. से उसके आधिकारिक ईमेल के माध्यम से संपर्क किया था।
वेंडर की ओर से कंपनी को मशीन की कीमत का 30 प्रतिशत एडवांस जमा करने के लिए कहा गया। इसके साथ बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते का विवरण और प्रोफार्मा इनवॉइस भी भेजा गया। कंपनी को ईमेल के जरिए लगातार भुगतान संबंधी जानकारी दी जा रही थी, जिससे उसे किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
बैंक खाते की जानकारी बदलकर भेजा ईमेल
बताया गया है कि 30 सितंबर को कंपनी को दोबारा ईमेल भेजकर एडवांस रकम केनरा बैंक के एक खाते में जमा करने के लिए कहा गया। चूंकि ईमेल वेंडर के आधिकारिक ईमेल आईडी से आया था, इसलिए कंपनी ने इसे सही मान लिया। इसके बाद कंपनी ने 3 अक्टूबर को 34.50 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।
रकम ट्रांसफर होने के बाद कंपनी को तब संदेह हुआ, जब 5 अक्टूबर को वेंडर के डायरेक्टर से संपर्क किया गया। डायरेक्टर ने साफ तौर पर बताया कि उनके पास कंपनी की ओर से कोई रकम प्राप्त नहीं हुई है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी का केनरा बैंक में कोई खाता ही नहीं है।
डायरेक्टर ने बताया- ईमेल हो चुका हैक
वेंडर के डायरेक्टर से बातचीत के बाद कंपनी को पूरे मामले की जानकारी हुई। डायरेक्टर ने बताया कि उनकी कंपनी का आधिकारिक ईमेल हैक कर लिया गया था और साइबर अपराधियों ने उसी ईमेल के जरिए कंपनी से संपर्क कर बैंक खाते की फर्जी जानकारी भेजी थी।
इसके बाद इरोज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन ने मामले की शिकायत पुलिस से की। सीताबर्डी पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उस बैंक खाते की जानकारी जुटा रही है, जिसमें 34.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। साथ ही ईमेल हैक करने वाले आरोपियों और रकम के लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
कारोबारी कंपनियों के लिए बढ़ता साइबर खतरा
इस घटना ने एक बार फिर कारोबारी कंपनियों के लिए ईमेल आधारित साइबर ठगी के खतरे को सामने ला दिया है। अपराधी पहले किसी कंपनी या उसके नियमित सप्लायर का ईमेल हैक करते हैं और फिर दोनों पक्षों के बीच होने वाले वास्तविक कारोबारी संवाद का फायदा उठाकर बैंक खाते की जानकारी बदल देते हैं। ऐसे मामलों में कंपनी को ईमेल वास्तविक होने के कारण किसी तरह का संदेह नहीं होता और लाखों रुपये सीधे ठगों के खाते में पहुंच जाते हैं।
पुलिस ने कंपनियों से अपील की है कि बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले बैंक खाते की जानकारी की फोन पर या व्यक्तिगत रूप से पुष्टि जरूर करें।



