Published On : Thu, Oct 7th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

बदलेंगे कोयला आपूर्ति के नियम

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– मांग-आपूर्ति का गणित बिगडऩे जैसी हालत पैदा नहीं हो, जो इस बार पैदा हुई है।

नागपुर- केंद्र कोयले की आपूर्ति और ताप विद्युत संयंत्रों में उसके भंडारण के नए नियम बनाएगा ताकि मांग-आपूर्ति का गणित बिगडऩे जैसी हालत पैदा नहीं हो, जो इस बार पैदा हुई है। कोयला और ऊर्जा मंत्रालय ने मिलकर ताप विद्युत इकाइयों के लिए मासिक कोयला आपूर्ति कार्यक्रम तैयार करने का फैसला लिया है ताकि मार्च के अंत तक सभी विद्युत इकाइयों के पास कम से कम चार करोड़ टन का भंडार रहे।

सूत्रों की माने तो इस समय ताप विद्युत इकाइयों के पास कोयले का करीब 73 लाख टन का भंडार है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने आपूर्ति बढ़ाई है और उसने इस महीने के अंत तक करीब 30 लाख टन की आपूर्ति का लक्ष्य तय किया है।

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वही ऊर्जा मंत्रालय के जानकारों का कहना हैं कि उन्होंने ताप बिजली संयंत्रों के लिए कोयला भंडारण के नियम संशोधित करने और बिजली संयंत्रों की आवश्यक मांग के मुतबिक इसकी गणना के लिए केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) के साथ बातचीत की है।

सीईए ऊर्जा मंत्रालय की तकनीकी इकाई है। यह कोयला भंडार के आंकड़े इस आधार पर इकट्ठे करती है कि बिजली उत्पादक इकाई में कितने दिन का भंडार बचा है। इससे सही तालमेल कायम नहीं हो पाता है क्योंकि इसे अधिक मांग की अवधि में कम और कम मांग की अवधि में ज्यादा माना जा सकता है।

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‘हमारे आकलन के मुताबिक मार्च के आखिर में ताप बिजली संयंत्रों के पास चार करोड़ टन कोयला होना चाहिए। मार्च से बिजली की अधिक मांग वाले महीने शुरू होते हैं मगर उस समय कोयले की आपूर्ति कम होती है।’

उन्होंने इस बारे में कोयला मंत्रालय को आंकड़ों के साथ बताया है कि 4 करोड़ टन का भंडार बनाने के लिए बिजली संयंत्रों को हर महीने कितना कोयला भेजा जाना चाहिए।

कोयला मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि अक्टूबर के आखिर तक कोयले की आपूर्ति पर्याप्त होगी। बिजली क्षेत्र की मौजूदा दैनिक मांग 17 लाख टन हैे, जिसमें से 13 लाख टन की आपूर्ति कोल इंडिया करती है।

कोयला मंत्रालय के अनुसार ‘अब देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश कम हो गई है, जिससे कोयले की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम बिजली की बढ़ी मांग पूरी करेंगे और अगले कुछ दिनों में ताप बिजली संयत्रों में कोयले का भंडार बनने लगेगा।’

देश की खदानों में कोयले की कोई कमी नहीं है। केवल मॉनसून लंबा खिंचने से मांग-आपूर्ति का अंतर पैदा हुआ है।’सितंबर के आखिर में भी बारिश जारी रहने और बिजली की मांग बढऩे से बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार निचले स्तर पर आ गया है। सितंबर की तुलना मेंं ज्यादा आपूर्ति से स्थिति पहले ही सुधरने लगी है।’

अगस्त से ताप इकाइयों में कोयले का भंडार कम हुआ है। इस समय 17 गीगावाट की बिजली उत्पादन इकाइयों के पास कोयले का कोई भंडार नहीं है और 21 गीगावाट की इकाइयों के पास 4 दिन से कम का कोयला भंडार है।

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