Published On : Fri, Aug 19th, 2016

ठेका चुरी का, निकाल रहे थे कोयला

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जांच में दोषी सिद्ध होने के बावजूद कार्यरत है महावितरण में
ऊर्जामंत्री का निर्देश महज दिखावा, हुआ समझौता

Coal
नागपुर:
वर्षो से ऊर्जा विभाग की महानिर्मिति कंपनी में ठेकेदारी कर रहे एक खापरखेड़ा की कंपनी विगत माह कोयला चोरी के जुर्म में धरी गई और महानिर्मिति में मिले एक ठेके को अधूरा छोड़ दिया और तो और ठेकेदारी पर तैनात किये गए मजदूरों को कई माहों के वेतन नहीं दिए। तीनों प्रकरण में दोषी सिद्ध हुए। ऊर्जा मंत्री ने कानूनन कार्रवाई के कड़क निर्देश दिए लेकिन आज भी वह कंपनी महानिर्मिति में कार्यरत है। चर्चा है कि इतने संगीन गैरकृत के बावजूद ऊर्जामंत्री से ठेकेदार का समझौता हो गया। क्या यही मोदी सरकार के अच्छे दिन की संकल्पना थी।

उक्त ठेकेदार कंपनी का वर्षो से कोराडी व खापरखेड़ा महानिर्मिति प्रकल्प में मेंटेनेंस में लेबर कॉन्ट्रैक्ट सह ऐश हैंडलिंग व कोल् हैंडलिंग का ठेका चल रहा है। ऐश हैंडलिंग व कोल हैंडलिंग का एक साथ ठेका मिला था।

सूत्र बतलाते है कि ऐश हैंडलिंग प्लांट का काम अधूरा में छोड़ दिए। वही कोल हैंडलिंग का काम जारी है। महानिर्मिति से कोयले की चुरी निकलने का भी ठेका इसी कंपनी को लगभग एक वर्ष पूर्व दिया गया था। यह कंपनी चुरी के आड़ में साथ-साथ कोयला भी पॉवर प्लांट के बहार ले जाने का सिलसिला जारी रखी थी और दहेगांव से खापरखेड़ा मार्ग पर जमा कर जरूरतमंदों को चालू बाजार भाव में बेच दिया करती थी।

जब महानिर्मिति कंपनी परिसर का दौर करने ऊर्जामंत्री पहुंचे तो उन्हें उक्त कंपनी के कारनामे की शिकायत मिली। ऊर्जामंत्री ने आनन-फानन में जांच करने का निर्देश देते हुए कहा था कि दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करे। महानिर्मिति प्रबंधन ने अपने स्तर से जांच करवाई। जिसमें उक्त कंपनी पर लगाए गए आरोप में कंपनी दोषी पाई गई। लेकिन आज तक उक्त कंपनी पर एफआईआर दर्ज नहीं करवाया गया।

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बताया जा रहा है कि उक्त कंपनी के प्रमुख ने अपनी राजनैतिक पहुंच का सहारा लेकर ऊर्जामंत्री से समझौता कर लिया। जिसके वजह से ऊर्जामंत्री ने उक्त कंपनी पर एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया।

Coal
इसी कंपनी ने विगत माह ठेकेदारी पर कार्यरत लेबर का 3-4 माह का वेतन नहीं दिया था। जिसकी शिकायत ऊर्जामंत्री से की गई। ऊर्जामंत्री ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया था लेकिन उसका भी पालन स्थानीय महानिर्मिति प्रबंधन ने नहीं किया। वही ऊर्जामंत्री के भाई की कंपनी ने भी लेबर कमिश्नर के निर्देश के बावजूद मजदूरों का बकाया 5 करोड़ रुपये वेतन देने के निर्देश महानिर्मिति के मुख्य अभियंता द्वारा दिए। लेकिन आज तक इस पर कार्यवाही नहीं की गई।

इसके बावजूद उक्त कंपनियां महानिर्मिति परिसर में बतौर अधिकृत रूप से ठेकेदारी कर रही है। ऊर्जा मंत्रालय में सर से लेकर पाव तक धांधलियां ही धांधलियां चल रही है। जिसमें सभी जिम्मेदार दोषी है। यह समय रहते ठीक नहीं हुआ तो कही राज्य के पूर्वमंत्री आज जो जेल में है, वैसा हाल न हो जाये। क्या इसे ही मोदी सरकार ने अच्छे दिन से निरूपित किया था।

 – राजीव रंजन कुशवाहा

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