Published On : Mon, Jul 9th, 2018

सिडको घोटाला : CM पर निशाना

नागपुर: सिडको भूखंड घोटाले को लेकर जमीन के सभी व्यवहार पर पूरी तरह पाबंदी और इसकी न्यायिक जांच की घोषणा भले ही मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा कर दी गई हो, लेकिन पूरा मामला ही मुख्यमंत्री के अंतर्गत आ रहे नगर विकास विभाग का होने तथा स्वयं ही इस संदर्भ में स्पष्टीकरण दिए जाने को लेकर रविवार को पूर्व मंत्री छगन भुजबल ने सीएम पर निशाना साधा.

मानसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए उपराजधानी पहुंचे भुजबल ने कहा कि सिडको मामले में कार्रवाई टाली जा रही है. केवल व्यवहार पर स्थगिति लगाने भर से मामला खत्म नहीं हो जाता है. चूंकि मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप हो रहे हैं, अत: दूसरों की ओर से खुलासा होने की बजाय स्वयं को निर्दोष करार दिया जा रहा है.

सरकार को घेरने की तैयारी
2 वर्षों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा होकर अब विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे भुजबल ने कहा कि सदन में उठाया जानेवाला प्रत्येक प्रश्न संबंधित वर्ग के लिए काफी महत्वपूर्ण रहता है, जिससे विरोधी दल की ओर से सदन के विचारार्थ रखे जानेवाले प्रत्येक मसले महत्वपूर्ण होते हैं. किंतु इन सवालों के जवाब देने में हमेशा ही टालमटोल की जाती है. उन्होंने कहा कि सदन में बोलने के लिए काफी सीमित दायरा होता है, जिससे लोगों से संवाद कर समस्याओं को हल करना जरूरी है.

किसानों की समस्याएं हैं. ओबीसी छात्रों के सवाल ज्यों के त्यों हैं. ऐसे कई मामलों को हरसंभव न्याय देने का प्रयास करने का आश्वासन उन्होंने दिया. 2 दिन पहले बारिश के कारण स्थगित हुई विधानमंडल की कार्यवाही पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के जलयुक्त शिवार की योजना ग्रामीण क्षेत्र में होने की जानकारी थी, लेकिन शहरी क्षेत्र में जलयुक्त शिवार था, इसका उदाहरण पहली बार देखने को मिला है.

पुनर्विचार करे बहुजन समाज
उन्होंने कहा कि संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर से अधिक मनुस्मृति श्रेष्ठ होने का वक्तव्य भिड़े गुरुजी द्वारा पुणे में देने की जानकारी मिली है, जिसका सभी ने मिलकर निषेध करना चाहिए. संत ज्ञानेश्वर से शुरू हुई परम्परा में सभी संत-महात्माओं ने मानव जाति एक होने तथा ऊंच-नीच का भेद नहीं रखने का ही संदेश विश्व को दिया है. मनुस्मृति केवल कुछ ही लोगों को श्रेष्ठ मानकर 97 प्रतिशत को शूद्र करार देती है.

इस मनुस्मृति को जलाने के संदर्भ में महात्मा ज्योतिबा फुले ने कई बार वक्तव्य किया. यहां तक कि डा. बाबासाहब आम्बेडकर ने इसे जला दिया, किंतु अब पुन: मनुस्मृति का डंका पीटा जा रहा हो, तो भिड़े गुरुजी के साथ वाले बहुजन समाज के बंधुओं को पुनर्विचार करना चाहिए.