नागपुर: नागपुर में ज्युबिनाईल जस्टिस बोर्ड (बाल न्याय मंडल) में बीते 3 महीने से कामकाज ठप्प पड़ा है। हालात ये है की बाल अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है जिस वजह से करीब 250 केस लंबित पड़े है। बाल अपराध से जुड़े संगीन मामले में हो रही लापरवाही का खामियाजा कई वकीलों और विभिन्न अपराधों के केस में जुड़े बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
बाल न्याय मंडल में मंडल के कोरम का सवाल चाईल्ड वेलफेयर ऑफिस के द्वारा पिछले हफ़्ते जिले के प्रधान न्यायाधीश के साथ हुई बैठक में भी उठा था। मंडल में तीन सदस्यों की बेंच का कोरम होता है जो बाल अपराधों से जुड़े मामले की सुनवाई करता है। इस मंडल में दो सदस्य सरकार द्वारा नामित होते है जबकि एक सदस्य न्यायाधीश होते है। फ़िलहाल में मंडल की सदस्य के तौर पर जेएमएफसी न्यायाधीश एन बेदरकर परमानेंट पोस्ट पर नियुक्त है लेकिन नियम के मुताबिक तीन सदस्यों का कोरम ही मामले की सुनवाई करता है। जिस वजह से किसी भी मामले पर न तो सुनवाई हो पा रही है और न ही फ़ैसला हो रहा है।
तीन महीने पहले तक कोरम पूरा था। इसी दरमियान सरकार की ओर से नियुक्त सदस्य खुशाल मेले पर किसी मामले में एफआईआर दर्ज होने पर उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दे दिया जबकि दूसरी सदस्य एडवोकेट सुजाता बोरकुटे की नियुक्ति चाईल्ड वेलफेयर कमिटी में होने की वजह से उन्होंने भी इस्तीफ़ा दे दिया। मंडल का कोरम न होने की वजह से न्याय व्यवस्था पर पड़ रहे असर के सवाल पर डिस्ट्रिक चाईल्ड वेलफेयर ऑफिसर विजय सिंह परदेशी ने बताया की उनके विभाग की तरफ से कोशिश जारी है। इस बाबत राज्य सरकार को सूचना दी गई है।
सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के अनुमोदन से होती है। हमने सरकार को अस्थाई तौर पर नागपुर के आस पास के जिलों के सदस्य को नागपुर में नियुक्त करने की भी अपील की है।
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