Published On : Wed, Sep 15th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

राज्यपाल ने किया सेंटर फॉर डिफेंस स्टडीज़ का उद्घाटन

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-बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के चलते यह समय की मांग

नागपुर: एशिया महाद्वीप हमेशा से आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान के लिए जाना जाता रहा है। बाकि देशों या महाद्वीपों की तरह यहां हथियार बनाने की कोई रेस नहीं है। लेकिन बदलते समय और देश के सामने उत्पन्न हो रहे अलग-अलग तरह के खतरों के मद्देनज़र हमें अपनी सुरक्षा के बारे में भी ज्ञान होना ज़रूरी है। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय इस विषय में पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है।

यह एक अत्यंत सरहनीय और स्वागत योग्य कदम है। इस आशय के विचार राज्यपाल और कुलाधिपति भगत सिंह कोश्यारी ने व्यक्त की। कोश्यारी बुधवार को शहर में नागपुर विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिफेंस स्टडीज़ के उद्घाटन के अवसर पर भाषण दे रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय की इस क्षेत्र में 11 पाठ्यक्रमों शुरू करने की योजना पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर कुलपति डॉ सुभाष चौधरी, प्रो-वाइस चांसलर डॉ संजय दुधे, महापौर दयाशंकर तिवारी, रजिस्ट्रार डॉ राजू हिवासे, एनसीसी ग्रुप कमांडर एम. कलीम मंच एवं अन्य मान्यवर मंच पर उपस्थित थे।

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बदलते हालातों के मद्देनज़र यह ज़रूरी कदम:
वर्तमान समय में कई एशियाई देश एक दूसरे को नष्ट करके अपनी ताकत साबित करना चाहते हैं और इसके लिए इन देशों की सरकारें आर्म्स रेस में लगी हैं। अतः विश्वविद्यालय ने इस कोर्स को शुरू करने की ज़रुरत महसूस की है। नागपुर में कौशल पर आधारित शिक्षा और प्रशिक्षण देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहर के विकास को देखते हुए इस तरह के कोर्स के ज़रिए छात्रों को रोज़गार दिलाने में सहायता प्राप्त होगी और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

रोज़गार के अवसर पैदा करने में होगा मददगार:
गोला-बारूद एवं अन्य हथियारों के उत्पादन में बड़ी संख्या में कंपनियां शामिल होंगी। न केवल वैज्ञानिक- इंजीनियर, बल्कि मैकेनिक और अन्य कर्मचारियों की भी आवश्यकता होगी, जिससे रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। कोश्यारी ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों को भविष्य के विकास के लिए कौशल हासिल करने का अवसर प्रदान करना चाहती है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है।

कोर्सेस के संचालन के लिए नहीं होगी साधनों की कमी:
कोश्यारी ने यह भी आश्वासन दिया कि इस तरह के पाठ्यक्रम को चलाने के लिए ज़रूरी धन और अन्य प्रकार की सहायता के दृष्टिकोण से विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई समस्या नहीं होगी। डॉ चौधरी ने अपने परिचयात्मक टिप्पणी में पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। तिवारी ने विश्वविद्यालय को ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया की इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और भी मज़बूत होगी। विश्वविद्यालय इन विषयों में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र, डिप्लोमा और डिग्री प्रदान करेगा। इन कौशल आधारित पाठ्यक्रमों और कोर्सेस में आईटीआई पासआउट, डिग्री धारक या दसवीं और बारहवीं पास छात्र प्रवेश कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ अभय मुद्गल ने किया और डॉ दुधे ने आभार माना।

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