Published On : Fri, Feb 14th, 2020

वेलेन्टाइन डे नही ,मातृ पितृ पूजन दिवस मनाये।पाश्चत्य जगत की नकल नहीं कर भारतीय संस्कृति से मनाए यह दिन – प्रताप मोटवानी

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मातृ पितृ पूजन दिवस 14 फ़रवरी को मनाया जाता है। इस दिन बच्चे माता पिता का पूजन करते हैं।

आज सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे दुनियाभर से करोड़ों लोग मातृ-पितृ पूजन दिवस का समर्थन करते हैं। यह संस्कृति रक्षा हेतु मनाया जाता है।
भारत देश में माता पिता का पूजन छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को 14 फ़रवरी के दिन हर वर्ष मातृ-पितृ पूजन दिवस मानाने का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ में 2012 से मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जाता है। गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चूडास्मा ने और
छिंदवाड़ा के कलेक्टर जे के जैन ने 14 फ़रवरी को माता-पिता की पूजा करके मातृ पितृ पूजन दिवस मानाने का जिले की सभी शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए नोटिस जारी किया है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की मंत्री नीरा याद
व के निर्देश अनुसार झारखण्ड राज्य के 50 हजार स्कूलों में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया गया।
मातृ-पितृ पूजन दिवस राजनांदगांव / डोंगरगांव. नगर की शिक्षण संस्था राइट गुरुकुल में मनाया गया जिसमे 1100 माता-पिता का पूजन हुआ।
राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग द्वारा 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस मनाने के रुप में अनुमोदित किया गया।

यह पर्व राजस्थान के भी कई विद्यालयों में भी मनाया जाता है जैसे कि आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय, सोजत पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल, बिड़ला इंटरनेशनल सीनियर सैकंडरी स्कूल, आदर्श गायत्री बाल विकास माध्यमिक विद्यालय, जिसमें विद्यार्थी अपने माता पिता का का तिलक लगाकर व माला पहनाकर पूजन करते हैं। भागलपुर में भी सैकड़ों बच्चों ने यह पर्व मनाया गया और मातृ-पितृ पूजन के दृश्य ने सबके हृदय को छू लिया, सभी की आंखों से आंसू छलक आये। मेयर सीमा साह ने माता-पिता पूजन कार्यक्रम को अच्छा प्रयास बताया। डॉ लक्ष्‍मीकांत सहाय, आकाशवाणी भागलपुर के वरीय उद्घोषक डॉ विजय कुमार मिश्र, डीआइजी विकास वैभव के अनुसार भी मातृ पितृ पूजन दिवस भारतीय संस्कृति के मूल्यों की रक्षा करने वाला है।

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विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड एजुकेशनल रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी और भुवनेश्वर के स्कूलों में भी मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2018 में, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और स्वामीनारायण प्रौद्योगिकी संस्थान ने माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया।
गणेश जी ने माता पार्वती और शिव जी की पूजा और परिक्रमा की थी। इसीलिए वे प्रथम पूज्य भगवान हैं

इस विषय में पौराणिक कथा इस प्रकार है कि – एक बार भगवान शंकर जी और पार्वती जी के दोनों पुत्रों कार्तिकेय जी और गणेश जी में होड़ लगी कि, कौन बड़ा? निर्णय लेने के लिए दोनों शिव-पार्वती जी के पास गए। शिव-पार्वती ने कहा कि जो संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले पहुँचेगा, उसी को बड़ा माना जाएगा। कार्तिकेय जी तुरन्त अपने वाहन मयूर पर निकल गये पृथ्वी की परिक्रमा करने। लेकिन गणेश जी ने ध्यान किया तो उन्हें उपाय मिल गया।

फिर गणेश जी ने शिव-पार्वती की सात प्रदक्षिणा कर ली क्योकि सारी पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो पुण्य होता है, वही पुण्य माता-पिता की प्रदक्षिणा करने से हो जाता है। तब से गणेश जी प्रथम पूज्य हो गये।

—–प्रताप मोटवानी नागपुर
अध्यक्ष विश्व सिंधी सेवा संगम महाराष्ट्र राज्य।।

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