– महामारी काल में मनपा के जिम्मेदार आला अधिकारियों की लापरवाही
नागपुर : कोरोना नामक इस महामारी में पिछले साल से अमूमन सभी कामकाज/व्यापार ठप हो चूका हैं.इस क्रम में हॉटेल व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ा है.बंद पड़े हॉटेल्स में से कुछ ने किराए पर कोविड केयर सेंटर शुरू करने की योजना बनाई।जिसकी अनुमति मनपा प्रशासन सहर्ष दे रही,वहीं दूसरी ओर सेवारत अस्पतालों को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अनुमति देने में दिए गए प्रस्तावों में खोट निकालकर उन्हें टाल रही हैं.
याद रहे कि देश में नवंबर 2019 में कोरोना ने तो नागपुर में फ़रवरी 2020 में दस्तक दी थी.इसके बाद से अनाज/डेयरी/सब्जी/फल/ऑनलाइन फ़ूड/मेडिकल स्टोर/अस्पताल के अलावा अल्प मात्रा में सार्वजानिक/निजी परिवहनों को ही शुरू रखा था.इसी दौर में होटल व्यवसाय पर भी अन्य व्यवसाय की तरह बुरा असर पड़ा.खासकर कुछेक बड़े ब्रांडेड हॉटेल्स को छोड़ दे तो शेष हॉटेल पिछले एक साल से बंद ही पड़े हैं.
इस दरम्यान कोरोना का पहला लहर थमा,कुछ माह बाद दूसरा लहर आया बड़ी तेजी से ,क्यूंकि प्रशासन ने रत्तीभर भी पूर्व तैयारी नहीं की ,नतीजा मंजूर अस्पताल फुल,50000 से अधिक पॉजिटिव करना मरीज अस्पताल के आभाव या पैसे के आभाव के कारण घर पर ही रहकर इलाज करवा रहे.
लेकिन दूसरी लहर ने प्रशासन की कमर पूर्णतः तोड़ डाली।नतीजा कागजों/घोषणों में नए सीसीसी सेंटर शुरू करने के गाजे-बाजे शुरू किये।इस अवसर का लाभ उठाने बंद पड़े छोटे-छोटे होटल सीसीसी के लिए किराये पर देने को तैयार हो गए,इस महामारी में जो किराया मिल जाए.
नए सीसीसी या अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज की अनुमति देने का अधिकार राज्य सरकार ने मनपा प्रशासन को दिए.मनपा प्रशासन इस मौके पर समय की मांग को नज़रअंदाज कर नए अस्पताल जो कोरोना के मरीजों का इलाज करने के इच्छुक हैं उन्हें अनुमति देने के बजाय उनके प्रस्तावों में खोट निकाल रोड़ा अटका रहा और दूसरी तरफ होटलों को सीसीसी में तब्दील करने की अनुमति सहर्ष दे रहे.
मनपा प्रशासन की इस दोहरी नीत इस महामारी में निंदनीय हैं.शहर क्र जागरूक नागरिकों में मनपा आयुक्त/महापौर से उक्त मामले में दखल देकर ठोस उपाययोजना करने की मांग की हैं.
सरकारी कोटे में इलाज करवाने वालों की सूची नहीं
कोरोना महामारी के लिए राज्य सरकार ने नागपुर शहर के लिए मनपा प्रशासन को नोडल एजेंसी नियुक्त किया।इन्हें सम्बंधित अस्पतालों में सरकारी कोटे और अस्पताल के निजी कोटे की देखरेख का भी जिम्मा दिया गया.इसके अलावा अस्पतालों में बीमारी के अनुरूप संसाधन हैं या नहीं इसके लिए भी जिम्मेदारी दी गई.मनपा प्रशासन का दावा हैं कि सभी अस्पतालों में मनपा ने ऑडिटर नियुक्त कर रखा हैं.इसके बावजूद पिछले एक साल में उक्त सभी अस्पतालों में सरकारी कोटे से कितने मरीजों का इलाज हुआ,इसका ब्यौरा उपलब्ध नहीं या फिर देने में आनाकानी कर रही.जानकारी सार्वजानिक न करने से भ्रष्टाचार की बू आ रही हैं.
उल्लेखनीय यह हैं कि आयेदिन मनपा प्रशासन द्वारा उक्त मामले में किये जा रहे घोषणों और हकीकत में काफी अंतर नज़र आ रहा.
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