Published On : Sat, Nov 21st, 2020

सीसी रोड फेज – २ : जाँच समिति में विवादास्पद सदस्य,जाँच कागजों तक सिमित

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– महापौर द्वारा नियुक्त की गई जाँच समिति को अवैध बतलाकर आयुक्त ने बनाई नई जाँच समिति

नागपुर : नागपुर मनपा में सीमेंट सड़क फेज-२ का टेंडर स्थानीय ठेकेदारों को मौका देने के लिए निकाला गया। इसके लिए टेंडर शर्त में JV (जॉइंट वेंचर) का मुद्दा प्रमुखता से रखा गया.जिससे सम्बंधित शर्तों के पालन करने वाले को टेंडर में भाग लेने की अनुमति का जिक्र किया गया। जिसका उल्लंघन मुंबई की अश्विनी इंफ़्रा ने नहीं किया। इसके बावजूद सम्बंधित विभाग के अधिकारी ने कार्यादेश दिया और तो और भुगतान अश्विनी इंफ़्रा के सहयोगी पार्टनर कंपनी के मूल खाते में टुकड़ों-टुकड़ों में दर्जन भर बार किया।इसकी पुख्ता सबूत मनपा ने आरटीआई के तहत आरटीआई के कार्यकर्ता को दी ,जिस आधार पर एक नहीं बल्कि ३ बार पत्र सह सबूत के आधार पर आयुक्त सह मुख्य अभियंता,कैफो,अधीक्षक अभियंता,कार्यकारी अभियंता को जानकारी देकर मेसर्स अश्विनी इंफ़्रा और उसके पार्टनर को काली सूची में डालने और सम्बंधित सभी दोषी अधिकारियों को निलंबित कर किये गए भुगतान की रकम वसूलने की मांग स्पष्ट रूप से की गई.इसके बाद भी मनपा प्रशासन उलटे घड़े की मार्फ़त जाँच समिति गठित कर मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहा.क्या प्रशासन का दोषी अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी से समझौता हो चूका हैं ?

आयुक्त द्वारा गठित समिति के सदस्य सम्बंधित विषय की बारीकी से अवगत होने के बावजूद न मीटिंग ले रहे और न ही विषय की गंभीरता समझ रहे.

महापौर द्वारा गठित समिति को अवैध ठहराया
मनपायुक्त ने उक्त मामले पर स्थाई समिति सभापति की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी,जिसमें कुछ अधिकारियों का समावेश था.जिसे आयुक्त ने गैरकानूनी बतलाकर उसका गठन नहीं होने दिया ,नतीजा समिति की हवा निकल गई.फिर मनपायुक्त ने एक समिति गठित की,जिसमें अधिकारियों और कानून विशेषज्ञ का समावेश होने की जानकारी प्राप्त हुई.इसमें विवादास्पद अधिकारी का समावेश हैं,वैसा अधिकारी जो बिना घुस के हस्ताक्षर नहीं करता।कक्ष में कब आता और कब जाता,सिर्फ उसे ही पता होता हैं.इनसे निष्पक्ष जाँच की उम्मीद समझ से परे हैं.४% वाले इसलिए मामले में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे क्यूंकि उन्हें इस टेंडर के एवज में ४% जो मिले।इसलिए इस मामले पर उपस्थिति दर्ज करवाकर किनारा हो जाते।

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अधीक्षक अभियंता जुगाड़ में
मामले को शांत करने के लिए अधीक्षक अभियंता विभिन्न हथकंडे अपना कर खुद का और सम्बंधित ठेकेदार कंपनी को बचाने के लिए शिकायतकर्ता/आरटीआई कार्यकर्ता से निपटने के लिए अबतक कई असफल प्रयास कर चुके हैं.दूसरी ओर बिंदास इसलिए भी हैं क्यूंकि मनपा में जब जब अधिकारियों के फंसने का मामला आता हैं तब तब सम्बंधित ठेकेदार कंपनी को शहीद कर दिया जाता हैं.इस दफे भी ऐसा ही कुछ होने की संभावना को नाकारा नहीं जा सकता।

ठेकेदार कंपनी मदमस्त
ठेकेदार कंपनी इसलिए बिंदास हैं क्यूंकि वे सीधे आरोपी नहीं हैं,इस हालात तक मामला लाने के लिए सम्बंधित अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से दोषी हैं.जैसे टेंडर के लिए QUALIFY नहीं थे तो WORKORDER छिना नहीं गया,दिया गया और JV खाता नहीं खोला गया तो भुगतान पार्टनर के पुराने खाते में बारंबार क्यों डाला गया.अर्थात प्रत्यक्ष दोषी CE,SE,EE,DEPUTY,JE और CAFO हैं.इसके बावजूद दोनों कंपनी को BLACKLIST या अन्य प्रकार की सजा दी गई तो न्यायालय की शरण में जाने हेतु तैयारी जारी हैं.

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