Published On : Thu, Apr 8th, 2021

कोरोना वायरस का इलाज कराने के लिए नगद जमा कराना होगा,माना पा अधिकारी मौन ?

Advertisement

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाज़ारी जोरों पर ।

विश्व में कोरोना ने भारत का नाम पहले पायदान पर लाके रख दिया है वहीं दूसरी ओर देश में महाराष्ट्र अव्वल नंबर पर दर्शाया गया इसी के साथ नागपुर शहर भी पीछे नहीं हैं ज़िले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार चार पाँच हज़ार मरीज़ कोरोना के चपेट में आ रहे हैं इन्हीं मामलों की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रहीं ।

मोहम्मद शाहिद शरीफ़ अशासकीय सदस्य जिला अधिकारी ग्राहक कल्याण परिषद इन्हें शिकायतें प्राप्त हुई हैं की निजी रोगनालय द्वारा कोरोना पीड़ित मरीज़ का इलाज करने के लिए पूर्व में हि लाखों रुपया जमा कराने के मामले सामने आ रहे हैं ग्राहक अधिनियम 1986 के तहत नियम में इलाज के पूर्व कोई राशि लेने का प्रावधान नहीं है और इसके लिए महानगर पालिका द्वारा ऑडिटर भी नियुक्त किए गए हैं

लेकिन हक़ीक़त में नज़ारा कुछ और है आरोप भी लग रहे हैं की नामचीन अस्पतालों से महानगर पालिका के अधिकारियों की साँठ गाँठ दिखाई दे रही है क्योंकि उनके द्वारा नामचीन अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की नई जा रही और वहीं दूसरी ओर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाज़ारी बड़े अस्पतालों से ही हो रही है यह इंजेक्शन ब्लैक में साढ़े 4 हज़ार लेकर छः हज़ार रुपये तक मरीज़ों को उपलब्ध कराया जा रहा है

Advertisement

अभि यह सवाल उठता है की खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त इनके विरूद्ध कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं क्योंकि सरकारी दाम पर जीवन आवश्यक वस्तु वाली दवाइयों को नियमित मूल्य से ही मरीज़ों को उपलब्ध कराना है लेकिन इनके ऊपर मापदण्ड रखने वाली संस्था है जिस में प्रमुख महानगर पालिका के आयुक्त और जिलाधिकारी आते हैं और उनके द्वारा इन मामलों को नज़र अंदाज़ किया जा रहा अख़बारों में रोज़ मामले आ रहे है इसके बावजूद भी ।अधिनियम का उल्लंघन सरकारी अधिकारियों के आशीर्वाद से हि हो रहा है ।

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.