Published On : Fri, Sep 6th, 2019

बीवीजी को कार्यादेश देने की खिलाफत की नगरसेविका पांडे ने

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मिली मनपायुक्त और स्थाई समिति सभापति से

नागपुर: कनक का कार्यकाल समाप्ति बाद कचरा संकलन के लिए अब नए सिरे से कम्पनियों को निर्धारित करने की दिशा में मनपा की ओर से टेंडर मंगाए लेकिन अब टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों और शर्तों को तोड़-मरोड़कर ‘एल १ ‘ कम्पनियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास संबंधितों द्वारा किया जा रहा.इस सम्बन्ध में धांधली होने का आरोप लगाते हुए निर्दलीय व् जागरूक नगरसेविका आभा पांडे ने मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर और स्थायी समिति सभापति से मिली और अपना तर्क लिखित रूप से उन्हें सौंप पुनःविचार करने की मांग की.यह कई मनपा व अन्य सरकारी विभागों में असफल रही हैं.

नगरसेविका पांडे के अनुसार टेंडर में सभी कम्पनियों की वित्तीय बोली को खोलने के लिए जो गुणांक आवश्यक थे, उनको दरकिनार कर गलत निर्णय लिया जा रहा है. शनिवार को होने जा रही स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जा रहा है, जिसे मंजूरी प्रदान नहीं करने की मांग भी उन्होंने की.

पांडे ने सवाल किया कि शहर में स्थित 10 जोन को 2 वर्गों में बांटकर अलग-अलग 2 कम्पनियों को कचरा संकलन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. मनपा द्वारा मंगाए गए टेंडर में 3 कम्पनियों की ओर से हिस्सा लिया गया था, जिसमें पुणे के सफेदपोश की बीवीजी इंडिया लिमिटेड कम्पनी की ओर से प्रभाग क्रमांक 1 से 5 तक के पैकेज क्रमांक 1 के लिए 1656 रु. प्रति मैट्रिक टन कचरा संकलन करने सबसे न्यूनतम बोली लगाई गई थी. इसी तरह प्रभाग क्रमांक 6 से 10 तक के पैकेज क्रमांक 2 के लिए एजी एन्वायरो इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लि. कम्पनी की ओर से 2045 रु. प्रति मैट्रिक टन की बोली लगाई गई. लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि बीवीजी इंडिया लि. कम्पनी को पैकेज-2 में 1800 रु. प्रति मैट्रिक टन के अनुसार तथा एजी एन्वायरों इन्फ्रा कम्पनी को पैकेज-1 में 1950 रु. प्रति मैट्रिक टन शुल्क अदा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इस तरह से कम्पनी को 144 रु. प्रति मैट्रिक टन अधिक का भुगतान किया जाना है.

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पांडे का यह भी कहना हैं कि कचरा संकलन के लिए एक ओर जहां जनता से प्रतिमाह 60 रु. के अनुसार प्रतिवर्ष 720 रु. का भुगतान वसूला जाना है, वहीं कम्पनियों को अतिरिक्त प्रति मैट्रिक टन के पीछे 144 रु. का लाभ पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा टेंडर में काम के अनुभव की शर्त के अनुसार 3 वर्ष का प्रमाणपत्र मांगा गया था, लेकिन कम्पनियों के पास 3 वर्ष का अनुभव नहीं होने के बाद भी तकनीकी बोली में कम्पनियों को उपयुक्त करार दिया गया. तमाम नियमों को ताक पर रखकर चल रही प्रक्रिया की पहले सघन जांच करने के बाद इसे अंतिम करने से पहले सदन में चर्चा के लिए भेजने की मांग भी उन्होंने की.

उल्लेखनीय यह हैं कि बीवीजी के खिलाफ ‘एल ३’ ए२जेड न्यायालय की शरण में हैं,इसकी मनपा प्रशासन,स्वास्थ्य विभाग,स्थाई समिति,लेखा व वित्त विभाग को जानकारी होने के बावजूद इस विषय को स्थाई समिति में मंजूरी हेतु लाया जाने के पूर्व मनपा प्रशासन ने क़ानूनी सलाह लेना उचित नहीं समझा।इसकी खिलाफत न हो इसलिए कुछ तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता विरोधकर्ता को चुप करने हेतु तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे.

दूसरी कल होने वाली स्थाई समिति की बैठक में कई दर्जन महत्वपूर्ण विषयों का समावेश हैं,इनमें बीवीजी और राज्य सरकार से मिले १५० करोड़ को खर्च का मसला मुख्य हैं,इतने महत्वपूर्ण विषयों को बिना चर्चा के मंजूरी मिनटों में देना तय हो चूका हैं,स्थाई समिति की बैठक लगभग ३० मिनट में समाप्त हो जाएंगी।जल्दी की वजह यह बतलाई जाएंगी कि शहर में मोदी दौरा हैं इसलिए जल्दबाजी में सब निपटाया गया.बाद में मिनट्स में हेरफेर कर आदतन कहानी गढ़ प्रचारित किया जाएगा।

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