Published On : Mon, Sep 10th, 2018

बंटी शेलके का नगरसेवक पद खतरे में !

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नागपुर: किसी भी महानगरपालिका के लिए नगरसेवक पद एक गरिमा का पद होता है. वह क्षेत्र का पालक समझा जाता है, जिसके माध्यम से क्षेत्र में प्रशासन सर्वांगीण विकास के कार्य को सफल अंजाम देती है. इन्हें मिलने वाली तवज्जों के लिए स्वयं नगरसेवक जिम्मेदार होते हैं, इन बखूबियों के बाद नागपुर मनपा के नगरसेवक कांग्रेस के बंटी शेलके का पद खतरे में आना एक बड़ा सवाल बन कर उभरा है, यह इ दिनों शहर में गर्मागर्म चर्चा का विषय बना हुआ हैं.

हुआ यूँ कि, बंटी शेलके को कांग्रेस ने भाजपा के गढ़, भाजपा के दिग्गज नेता के प्रभाग से उम्मीदवारी दी. हालाँकि वह इसी प्रभाग में निवास करता है. मनपा चुनाव में उक्त भाजपा नेता के ‘किचन कैबिनेट’ के सदस्य एवं पूर्व स्थाई समिति सभापति को पुनः उम्मीदवारी दी थी. जिसके खिलाफ शेलके कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार थे. भाजपा उम्मीदवार के पक्ष अंतर्गत सभी विरोधियों द्वारा भाजपा उम्मीदवार का साथ न दिए जाने से शेलके की जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ.

शेलके नगरसेवक बनते ही भाजपा नेताओं,मनपा,बिजली,पुलिस सह अन्य विभागों के खिलाफ असंवैधानिक ढंग से आंदोलन करना शुरू किया. आंदोलन का मार्ग भटकने से ५ दर्जन से अधिक मामले पुलिस प्रशासन ने दर्ज किए.

इतना ही नहीं कांग्रेस पक्ष में भी उंगलियों पर गिनने लायक नेताओं को छोड़ शेष पर छींटाकशी करने में बाज नहीं आए.

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बतौर नगरसेवक अधिकार का उपयोग करने के बजाय नागरिकों को उकसा कर सबके जान-माल को खतरे में डाल नाले में उतर सफाई अभियान का दिखावा किया. एक बार करते करते शेलके ने मनपा आमसभा का कामकाज शुरू रहते आंदोलनकारी आशा वर्कर को आमसभा सभागृह में प्रवेश करवाकर कामकाज में बाधा डालने की कोशिश की. नाराज प्रशासन ने सम्बंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में मामला भी दर्ज करवाया.

इसके बाद से ही शेलके की उलटी गिनती शुरू हो गई. पिछले कुछ सप्ताह तक सत्तापक्ष शेलके के निलंबन की प्रस्ताव को एक-दूसरे पर ढकेलते रहे. अंत में शेलके के निलंबन के प्रस्ताव को आमसभा में लाया गया, क्यूंकि आयुक्त किसी कारण ६ सितम्बर की आमसभा में अनुपस्थित रहने वाले थे, इसलिए यह सभा रद्द कर २४ सितम्बर को आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इस सभा में शेलके के निलंबन के प्रस्ताव पर मुहर लगेगी.

उल्लेखनीय यह है कि शेलके को मनपा प्रशासन ने कई मौके दिए. उनका पक्ष रखने के लिए लेकिन उन्होंने किसी की एक न सुनी. भाजपा भी आगामी चुनावों को देखते हुए शेलके पर नकेल कसने के इरादे से उक्त प्रस्ताव को आमसभा में लाने पर मजबूर हुआ.

उधर कांग्रेस का कहना है कि शेलके के निलंबन मामले में क़ानूनी अड़चन हैं. शेलके वैसे भी कांग्रेस के लिए लाभप्रद साबित नहीं हुआ. इस चक्कर में वह ‘बन’ गया. इन्हीं आंदोलन प्रवृत्ति को सामने रख एवं कुणाल को दबाने के लिए प्रदेश युकां अध्यक्ष ने शेलके को गल्ली से उठा कर केंद्रीय कार्यकारी का पदाधिकारी बना दिया. दूसरी ओर प्रभाग के कांग्रेसी समर्थक शेलके को लेकर निराश हैं, क्यूंकि पिछले डेढ़ साल में शेलके ने प्रभाग का कुछ भी भला नहीं किया.

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