Published On : Sat, Sep 27th, 2014

भंडारा : मंगल को तय होगा नवेगांव-नागझिरा, बोर व्याघ्र प्रकल्प का बफर क्षेत्र

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वन विभाग ने बुलाई विशेषज्ञ समिति की बैठक

भंडारा। नवेगांव-नागझिरा और बोर व्याघ्र प्रकल्प का बफर क्षेत्र मंगलवार 30 सितंबर को तय हो जाएगा. दोनों व्याघ्र प्रकल्प के आसपास के क्षेत्र को बफर क्षेत्र घोषित करने के संबंध में 2 अगस्त को विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई थी. अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्य जीव) के कक्ष में हुई इस बैठक में की गई चर्चा के आधार पर कार्यवाही के संबंध में समीक्षा के साथ ही आवश्यक मुद्दों पर मंगलवार को आयोजित विशेषज्ञ समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी. बोर व्याघ्र प्रकल्प हाल ही में बनाया गया है, जबकि नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प को बने कई साल हो चुके हैं. वन कानून के अनुसार व्याघ्र प्रकल्प के निर्माण के बाद उसके आरक्षित क्षेत्र से सटकर बफर क्षेत्र का निर्माण भी जरूरी होता है. लेकिन, बफर क्षेत्र की घोषणा के बाद उस क्षेत्र के गांवों का पुनर्वास हमेशा विवाद का मुद्दा रहा है. बफर में कितना क्षेत्र जाएगा, उसी हिसाब से यह तय होता है कि कितने गांवों का पुनर्वास करना होगा. पुनर्वास को लेकर कभी भी गांववासी संतुष्ट नहीं रहे हैं. अब तक अनुभव यही है.

गांव वालों का आरोप है कि पुनर्वास के लिए दी जाने वाली राशि और किए जाने वाले आश्वासन कभी पूरे नहीं किए जाते. एक मेलघाट को छोड़ दिया जाए तो पुनर्वास के मुद्दे पर अन्य सारे व्याघ्र प्रकल्प असफल ही रहे हैं. इसीलिए इन दोनों व्याघ्र प्रकल्पों के बफर क्षेत्र के निर्धारण पर सबकी नजर लगी हुई है. कहा जाता है कि नवेगांव-नागझिरा के लिए कोई फैसला करना वन विभाग के लिए आसान होगा, मगर बोर व्याघ्र प्रकल्प को लेकर गांव वासियों की शिकायत आज भी कायम है. यानी तय है कि बफर क्षेत्र की घोषणा के बाद गांववालों का स्वर और मुखर होने वाला है. नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प की समिति में भंडारा के मानद वन्यजीव रक्षक राजकमल जोब, गोंदिया के मानद वन्यजीव रक्षक सावन बाहेकर, विदर्भ निसर्ग संरक्षण संस्था के दिलीप गोडे, सातपुड़ा फाउंडेशन के किशोर रिठे, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आॅफ इंडिया के प्रफुल्ल भांबुरकर और गोंदिया जिले के आमगांव के वनस्पतिशास्त्र विभाग के डॉ. भुस्कुटे का समावेश है. उधर, बोर व्याघ्र प्रकल्प की कमेटी में विदर्भ निसर्ग संरक्षण संस्था के दिलीप गोडे, सातपुड़ा फाउंडेशन के किशोर रिठे, आदित्य जोशी, हिस्लॉप कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. आर. जे. एंड्रयूज, मानद वन्यजीव रक्षक कुंदन हाते, रोहित कारू, कौशल मिश्रा आदि शामिल हैं.

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