Published On : Mon, Jun 1st, 2015

धीरे-धीरे नकाब उतर रहा भाजपाई नेता-मंत्री का

-नशा उतारते ही भाग रहे समर्थक
-पक्ष के कार्यकर्ता भी पशोपेश में

नागपुर। भाजपा सत्ता में आने के पूर्व और आने के बाद लगभग सभी पार्टी दल और उसके नेताओं को झूठा-फरेबी कहकर सभी बदनाम कर खुद की वाहवाही करने मग्न है. वही दूसरी ओर भाजपा और उसके नेताओं ने जो चुनाव पूर्व या पश्चात् वादा किये थे, उसे लेकर रोजाना कोई न कोई भाजपा नेताओं के कपडे बुरी तरह फाड़ रहा है. विगत सप्ताह नगर में एक घटना के दौरान भाजपा मंत्री को खून के आंसू रोने पर मजबूर होना पड़ा.

मई 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के उम्मीदवार ने असरदार लोगो का समर्थन जुटाने के लिए पक्ष के पूर्व विधायक को जिम्मा सौंपा. सूत्र की माने तो इस पूर्व विधायक का खासमखास उमरेड रोड निवासी बबन ने माध्यम से असरदार लोगो की मोर्चे को सफलतापूर्वक संभाला. इस दौरान बबन निवास पर भाजपा उम्मीदवार की पत्नी और बेटे कई दफा गए थे. इसी दौरान बबन को अपने खुद के धंधे को पूर्ण शबाब में रहते हुए बंद कर सफ़ेद वस्त्र धारण कर उक्त भाजपा उम्मीदवार के लिए शारीरिक, मानसिक और आर्थिक ताक़त भी लगानी पड़ी.

चुनावी दंगल में खुदने से पहले भाजपा उम्मीदवार ने पूर्व विधायक को खंभा ठोककर आश्वासन दिया था कि चुनाव जितने के बाद उसे और उसके सैकड़ों सक्षम सहयोगियों को लाभ के पद पर विराजमान करवाएंगे. गडकरी तब तक वादे के पक्के माने जाते थे. इस बिना पर पूर्व विधायक और उनके सहयोगी बबन आदि ने सभी जगह से पसीना बहाकर भाजपा उम्मीदवार को पहली बार संसद भवन में पहुँचाया, जो आज तक कभी सीधे रास्ते से चुनाव न लड़ा. हरदम पीछे के रास्ते से धनबल के बिना पर विधानपरिषद का सदस्य बनते रहे और इसी के भरोसे मंत्री पद का भी सुख भोगे.

बात तब से बिगड़नी शुरू हो गई जब से भाजपा उम्मीदवार ने चुनाव जीता और सिर्फ अपने समाज के लोगो हमेशा दरवाजे खुले रखे और अन्यों के लिए न दिखने वाली बैरिकेटिंग कर दी. इतना ही नहीं जब उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया गया तो उन्होंने अपने सभी करीबियों को मुख्यमंत्री के घर और कार्यालय चढ़ने से मना कर दिया.

इसके अलावा जिन्होंने बढ़ी उम्मीद से चुनाव में जी-जान लगाकर काम किया उन्हें भी दरकिनार करना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं मोहन मते को तो ऐसा ऐसा घुमाया कि उसका सर घूम गया और एक दिन अपने दलबल के साथ अपने सांसद पर चढ़ गया. सांसद ने पूर्व विधायक के इरादे को भांपकर उसे ठंडा करने के इरादे से निर्देश दिया कि अपने गट से किन्ही 3 का बायोडाटा लेकर आओ, उसे मैं लाभ के पद पर बिठाऊंगा. मते ने चौधरी, कालबांडे और बबन का नाम आगे किया. सांसद ने फिर मते को घूमना-बेवकूफ बनाना शुरू किया. जब कई दिन बीत गए तब बबन ने पूर्व विधायक को फटकार लगाई. इस वजह से पूर्व विधायक का दिमाग ख़राब हो गया. पूर्व विधायक ने सांसद घर के चक्कर लगा-लगा कर रात में सांसद को बबन राय और अन्य साथियो के संग पकड़ा. पूर्व विधायक का रंग-रूप देखकर सांसद पहले सकपका गया, फिर पूर्व विधायक ने चढ़ाई करते हुए कहा कि यह बायोडाटा किसके-किसके दिए, मैं पहचानता नहीं, कौन है ये.

अपना आपा खो चूका बबन ने कहा मैं हु, अब मुझे पहचान नहीं रहे, चुनाव पूर्व मैं नहीं तुम्हारी पत्नी-बच्चे मेरे घर के चक्कर लगा रहे थे. चल पूर्व विधायक यह क्या देगा, ये ही भिखारी है और सभी चलते बने.

इस प्रकार धोखाधड़ी की घटना आये दिन घटती रहती है, जब-जब वे नागपुर में होते है. एक उत्तर भारतीय ठेकेदार ने विधानसभा की टिकट मांगी तो उसे कह दिया राजनीति तुम्हारे बस का खेल नहीं, 1000-2000 करोड़ के ठेके ले लो. अपने विभाग से दे देता हु. एक वरिष्ठ वकील ने चुनाव जीतने के बाद मिलने हेतु कार्यालय में संपर्क किया तो उनके निजी सचिव उन्हें भली-भांति जानते थे. उन्होंने कहा कि आज कल में मुलाकात मुश्किल है, सकपकाये उक्त वकील ने जवाब दिया कि जब भी फुर्सत हो मिल लेंगे. वैसे मुझे कोई काम नहीं है, गुस्से का आलम यह था कि कल सांसद का जन्मदिन था फिर भी नहीं गए.