Published On : Mon, Dec 18th, 2017

अस्मिता कार्ड और शाह के प्रबंधन से कांग्रेस पर भारी पड़ी भाजपा

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अहमदाबाद: गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजों ने जहां भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुकून दिया है वहीं कांग्रेस और उसके नव निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इन नतीजों का 2018 में होने वाले कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कुल सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी असर पड़ेगा।

गुजरात में जिस तरह कांग्रेस और पाटीदार आंदोलन की चुनौती के बावजूद भाजपा अपनी सरकार बचाने में अगर सफल रही तो उसकी सिर्फ दो ही वजह है- पहली नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनका गुजराती अस्मिता कार्ड और अमित शाह का चुनाव प्रबंधन।

मोदी के गुजराती अस्मिता के जवाब में राहुल गांधी ने गुजराती असंतोष को मुद्दा बनाया। चुनाव प्रचार और जन सभाओं में राहुल को लोगों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया भी मिली जिसने कांग्रेस में जीत की उम्मीद पैदा की। राहुल ने सोशल मीडिया के जरिये प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछकर भाजपा को गुजरात मॉडल और विकास पर घेरने की भरपूर कोशिश की।

उसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। लेकिन कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, सलमान निजामी के बयानों ने मोदी को चुनाव का एजेंडा बदलने का मौका दे दिया। मोदी ने अपने भाषणों से राहुल के गुजरात असंतोष के मुद्दे को गुजरात अस्मिता के कार्ड से पीछे छोड़ दिया। मोदी ने पाकिस्तान और अहमद पटेल का आक्रामक तरीके से ज़िक्र करके उसमें हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का तड़का लगाकर सामाजिक ध्रुवीकरण को भी धार दे दी।

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