Published On : Mon, Nov 11th, 2019

सरकार के लिए शिवसेना ने मानी पवार की शर्त, 30 साल पुराने गठबंधन को बाय-बाय!

Advertisement

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की सियासी खींचतान ने दोनों दलों के 30 साल पुराने गठबंधन को खत्म करने की कगार पर पहुंचा दिया है. साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी और शिवसेना अपनी-अपनी शर्तों के चलते गठबंधन में सरकार नहीं बना पा रहे हैं और हालात ये हो गए हैं कि सरकार बनाने के लिए शिवसेना विरोधी एनसीपी की शर्त मानने को राजी हो गई है, जिसने हिंदुत्व के विचार पर चल रहे दशकों पुराने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की राहें अलग कर दी हैं.

बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन 1989 में हुआ था. ये वो वक्त था जब शिवसेना की कमान उसके संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के हाथों में थी, जो हिंदुत्व का बड़ा चेहरा थे. बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन भी हिंदुत्व के विचार पर ही आगे बढ़ा. बाला साहेब ठाकरे के जिंदा रहने तक दोनों पार्टियां का गठबंधन बदस्तूर चलता रहा लेकिन 2012 में उनके निधन के बाद जब 2014 में विधानसभा चुनाव हुए तो शिवसेना और बीजेपी अलग हो गईं. दोनों पार्टियों ने अपने-अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ा. हालांकि, बाद में शिवसेना देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई.

सरकार में रहकर भी शिवसेना करती रही आलोचना
दिलचस्प बात ये है कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में शिवसेना पांच साल तक महाराष्ट्र की सरकार में रही, लेकिन उसके नेताओं ने कोई ऐसा मौका नहीं चूका जब बीजेपी और सरकार की आलोचना न की हो. यहां तक कि केंद्र की मोदी सरकार पर टिप्पणी करने से भी शिवसेना नेता पीछे नहीं रहे.

गठबंधन में 50-50 फॉर्मूला तय हुआ
पांच साल खटास के बावजूद बीजेपी और शिवसेना ने 2019 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ा. हालांकि, शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले के तहत सत्ता की बराबर भागीदारी की शर्त पर ही साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया. लेकिन अक्टूबर में जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो मुख्यमंत्री पद बीजेपी और शिवसेना भिड़ गईं. शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले में ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री के पद का वादा याद दिलाया, तो बीजेपी की तरफ से फडणवीस ने दो टूक कह दिया कि ऐसा कोई वादा था ही नहीं. लिहाजा, दोनों पार्टियां में इस बात पर ठन गई, जिसका नतीजा ये हुआ कि राज्यपाल का ऑफर मिलने के बावजूद बीजेपी को कहना पड़ा कि वह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है.

Advertisement

10 नवंबर को बीजेपी के इस ऐलान के तुरंत बाद महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बदल गए और एनसीपी ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने पर शर्त रख दी. एनसीपी ने कहा कि शिवसेना को एनडीए से बाहर होना पड़ेगा और उसके मंत्री को मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ेगा. एनसीपी की इस शर्त को 24 घंटे भी नहीं गुजरे कि शिवसेना कोटे से केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Follow Nagpur Today on Google
Add Nagpur Today to your Preferred Sources on Google to see our latest news more prominently in Search.