Published On : Sat, Feb 18th, 2017

भाजपा ने लगाया नागपुर सिटी बस सर्विस को कई सौ करोड़ का पलीता

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  • हर महीने 11 करोड़ रूपए के नुकसान का बोझ नागपुरवासियों की जेब पर
  • अब तक डेढ़ सौ करोड़ रूपए से ज्यादा का चूना लगा
  • 9 साल से जनता भुगत रही है भाजपा की गलती का खामियाजा

Nagpur City Bus
नागपुर:
वर्ष 2007 में महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम द्वारा संचालित नागपुर की शहर बस सेवा का अधिकार छीनकर वंश निमय इंफ़्रा प्रोजेक्ट नामक निजी कंपनी को सौंपते हुए महानगर पालिका की ओर से नागपुरवासियों को आश्वस्त किया गया था कि बेहतरीन बस सेवा पर महाराष्ट्र की उपराजधानी वासियों का भी तो अधिकार है. उस समय नागपुर महानगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता थी और यह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व सहित नागपुर मनपा की सत्तासीन दल का एकमत से लिया गया फ़ैसला था कि नागपुर सिटी बस सेवा को राज्य सरकार के अधिकार से छीनकर निजी ऑपरेटर के हाथों में सौंप दिया जाए.

भाजपा के इस फैसले से नागपुर वासियों को क्या हासिल हुआ?
नौ साल हो गए शहर बस सेवा को निजी ऑपरेटर द्वारा संचालित करते हुए और आलम यह है कि नागपुर के निवासी अब सिटी बस सेवा के नाम से ही सिहर उठते हैं. बीते नौ साल में नागपुर वासियों ने जैसे यह मान लिया है कि शहरवासियों के लिए कोई बस सेवा भी हुआ करती है. नौ साल पहले तक नागपुर के 142 रूट पर सिटी बस सेवा राज्य सरकार संचालित करती थी. वंश निमय इन्फ्राप्रोजेक्ट ने जब शहर बस सेवा का संचालन शुरु किया तो 142 में से सिर्फ 47 रूट पर ही अपनी बसें दौड़ा पायी. पिछले साल वंश निमय से भी बस संचालन के अधिकार छीनकर दूसरे निजी ऑपरेटर को सौंप दिए गए. इस बार भी नया बस ऑपरेटर भाजपा के कद्दावर नेता नितिन गड़करी ही लेकर आए. ये ऑपरेटर दिल्ली में बसें चलाते रहे हैं और अपनी सेवाओं के लिए कुख्यात हैं. दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम लिमिटेड (डीआइएमटीएस) नामक इस निजी कंपनी ने जब नागपुर सिटी बस सेवा संचालन का भार सौंपा गया तो उसमें उक्त कंपनी को सिटी बस सेवा प्रबंधक बनाया गया. यानी सिटी बस सेवा नागपुर महानगर पालिका संचालित करेगी और इंटीग्रेटेड बस ट्रांसपोर्ट मैनेजर (आइबीटीएम) नामक यह कम्पनी केवल बस सेवा के प्रबंधन का कार्य देखेगी.

एक साल में एक सौ बीस करोड़ का घाटा
पिछले साल वंश निमय इन्फ्राप्रोजेक्ट से सिटी बस सेवा का संचालन छीनकर जब नागपुर मनपा ने अपने और उसके सहयोगी आइबीटीएम ने अपने हाथों में लिया तो उसे सिर्फ एक साल में 120 करोड़ रूपए का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ा. वंश निमय से काम छीनते समय मनपा के सत्ताधारियों का अनुमान था कि ज्यादा से ज्यादा 32-33 करोड़ रूपए का नुकसान होगा. लेकिन नुकसान अनुमान से चार गुना ज्यादा का हुआ. तय है इस नुकसान का बोझ नागपुर वासियों की जेब पर पड़ा. वंश निमय ने अपने नौ साल के संचालन में कभी भी नुकसान नहीं झेला था. एक रूपए का भी नहीं. फिर ऐसा क्या हुआ कि नागपुर मनपा और आइबीटीएम ने मिलकर एक सौ बीस करोड़ रूपए का घाटा करा दिया? मजेदार तथ्य यह है कि वंश निमय 47 रूट पर शहर बस सेवाएं संचालित करती थी और जब मनपा और आइबीटीएम ने मिलकर यह काम लिया तो भी इतने ही रूट पर बस सेवाएं संचालित हुईं. जबकि अब जरूरत 142 रूट से बढ़कर 160 रूट के आसपास तक पहुँच गयी है. यानी जरुरत के लिहाज से सिर्फ 113 रूट अब भी सिटी बस का बस इंतजार ही कर रहे हैं.

ये हैं मुख्य रूट
नागपुर शहर बस सेवा के सात मुख्य रूट माने जाते हैं. ये हैं कलमेश्वर, कामठी-कन्हान, पारडी, पिपला फाटा, वडधामना, बुटीबोरी और हिंगना. इन सात मुख्य रूट के अलावा लगभग 153 उपमार्ग हैं जहाँ सिटी बस सेवा की अनिवार्य दरकार है, लेकिन फ़िलहाल सिर्फ चालीस रूट पर ही सिटी बस सेवा संचालित हो रही है.

जरुरत पांच सौ बसों की है, सड़क पर सिर्फ ढाई सौ बसें ही
वंश निमय जब सिटी बस सेवा संचालित कर रही थी तो उसके पास ढाई सौ बसें थी. इनमें से एक-चौथाई बसें इतनी ख़राब हालत में थी कि उन्हें हमेशा गैरेज में ही रखना पड़ता. मनपा और आइबीटीएम ने मिलकर जब बस संचालन शुरू किया, उसके पहले एक साल तक ‘ग्रीन बस’ के नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट हमारे सांसद नितिन गड़करी नागपुर में लॉन्च कर चुके थे. तो जब मनपा और आइबीटीएम ने मिलकर सिटी बस सेवा यहाँ संचालित करनी शुरु की तो उस समय जोरशोर से इस बात की भी घोषणा की गयी कि ‘ग्रीन बसें’ भी नागपुर की सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ाई जाएंगी. लेकिन फिर आइबीटीएम से नागपुर मनपा का ‘ग्रीन बसों’ को लेकर कुछ मनमुटाव हो गया और नितिन गड़करी के निर्देश पर नागपुर मनपा ने तय किया कि ‘ग्रीन बसें’ बनानेवाली स्वीडिश कंपनी स्कैनिया ही नागपुर में ‘ग्रीन बस सेवा’ संचालित करेगी. मजेदार तथ्य यह है कि ग्रीन बस बनानेवाली स्वीडिश कंपनी स्कैनिया को भारत एं बस सेवा संचालित करने का कोई अनुभव भी नहीं है. फिर भी सारे नियम-कायदे को ताक पर रखकर नागपुर की ‘ग्रीन बस सेवा’ स्कैनिया के हवाले कर दी गयी. 2016 के आखिरी महीने में डेढ़ सौ से ज्यादा ग्रीन बसें चलाने की घोषणा की गयी, लेकिन उस समय बस 55 ग्रीन बसें ही नागपुर पहुँच सकी थी, सो इन्हीं में से कुछ को सड़क पर पायलट प्रोजेक्ट के नाम पर दौड़ाया जाने लगा. मजेदार यह है कि ये ग्रीन बसें पेट्रोल-डीजल पर नहीं बल्कि एथेनॉल ईंधन से चलती हैं. स्वाभाविक है कम लागत में ज्यादा मुनाफे के लिए ही ग्रीन बस की अवधारणा तैयार की गयी है. वातावरण में कार्बन का उत्सर्जन एथेनॉल की वजह से लगभग नगण्य हो जाता है, सो पर्यावरणीय सरोकार का तमगा मुफ्त में. लेकिन भारत में एथेनॉल अभी तक इतनी मात्रा में तैयार नहीं होता है कि उससे बस सेवाएं संचालित की जा सकें. पर नागपुर में तो ग्रीन बसें दौड़ रही हैं, भले ही 50-55 ही. नागपुर महानगर पालिका चुनाव के मद्देनजर 18 फरवरी से तो सभी मुख्य पांच रूट पर ग्रीन बसों को धड़ल्ले से दौड़ाया जा रहा है. आप चाहें तो इसे निष्पक्ष चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मान सकते हैं, स्वीडिश कंपनी स्कैनिया ऐसा नहीं मानती. क्यों नहीं मानती? इस सवाल का जवाब ढूंढ पाना किसी के लिए मुश्किल नहीं.

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दो साल तक नितिन गड़करी ने मुफ्त में एथेनॉल दिया
तीन साल पहले 2014 के अगस्त महीने में जब ‘ग्रीन बस’ पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नागपुर में लॉन्च हुआ, तब से पिछले साल सर्दियों तक नागपुर के सांसद नितिन गड़करी मुफ्त में ग्रीन बसों को एथेनॉल उपलब्ध करा रहे थे. दो साल में उन्होंने लगभग एक करोड़ रूपए से ज्यादा का एथेनॉल स्कैनिया को मुफ्त में दिया. हालाँकि पायलट प्रोजेक्ट के रुप में उस समय ग्रीन बस सिर्फ एयरपोर्ट से सीताबर्डी तक ही दौड़ती थी.

अब कहाँ से आ रहा है एथेनॉल
इस समय पचपन ग्रीन बसें नागपुर की सड़क पर दौड़ रही हैं. स्वाभाविक है ईंधन के तौर पर इसमें एथेनॉल ही प्रयुक्त होता है. ये एथेनॉल कहाँ से आता है, इसकी आधिकारिक जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है. सूत्र बताते हैं कि नागपुर के समीप मौदा नामक कस्बे में वृहद् एथेनॉल प्रक्रिया प्लांट लगाया जा रहा है. फ़िलहाल नितिन गड़करी की ही एक कंपनी में एथेनॉल प्रक्रिया की जाती है. फ़िलहाल एथेनॉल चुसे हुए गन्ने से तैयार किया जा रहा है. शक्कर बनाने के लिए जो गन्ने इस्तेमाल किए जाते हैं, उसी चुसे हुए गन्ने की डंठल से एथेनॉल इस समय तैयार किया जा रहा है. नितिन गड़करी ने एक सभा में दावा किया था कि धान और गेंहू के फूस और बांस से भी एथेनॉल बनाया का सकता है. उसी सभा में उन्होंने यह भी कहा था कि गत नौ साल से वह वैकल्पिक ईंधन के जरिए बस चलाने की तकनीक पर काम कर रहे हैं और जल्दी ही वह बायोगैस और स्वनिर्मित बिजली के जरिए नागपुर में बसें दौड़ाएंगे. बताया जाता है कि स्कैनिया फ़िलहाल नितिन गड़करी की कंपनी से ही एथेनॉल खरीद रही है.

शहर बस सेवा का घाटा प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स को दुगुना बढ़ाकर वसूला जा रहा है
नागपुर महानगर पालिका और आइबीटीएम मिलकर जो हर महीने लगभग ग्यारह करोड़ रूपए का नुकसान सिटी बस सेवा का कर रहे हैं, उसकी वसूली के लिए मनपा की सत्तासीन भाजपा ने पहले ही खाका तैयार कर लिया था. इसीलिए बीते दो साल में नागरिकों से दोगुने दर से प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स यानी संपत्ति और पेयजल कर वसूले जा रहे हैं. शायद इसी को कहा जाता है ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस.’

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