Published On : Sat, Jun 2nd, 2018

भाजपा को महाराष्ट्र में सबसे बड़ा खतरा!

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BJP

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों के उपचुनावों में साझा विपक्ष से लड़ते हुए कमोबेश अपना वोट बचाने में कामयाब रही है या उसे बढ़ाया है। पर उसे महाराष्ट्र में बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। कांग्रेस और एनसीपी के एकजुट होने से उसका वोट कम हुआ तो शिवसेना के अलग लड़ने से भी उसे बड़ा नुकसान हुआ है। वह पालघर की सीट शिवसेना को हरा कर जीत गई पर वहां के आंकड़े भी उसके लिए अच्छा संकेत नहीं हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा और शिवसेना 30 साल में पहली बार लोकसभा का चुनाव अलग अलग लड़े थे। इसमें शिवसेना ने भाजपा को नाको चने चबवा दिए। अगर बहुजन विकास अघाड़ी ने दो लाख 22 हजार वोट नहीं काटे होते को कहा जा रहा है कि शिवसेना का उम्मीदवार दो लाख वोट से जीतता। 2014 के लोकसभा चुनाव में पालघर सीट पर भाजपा को 53.7 फीसदी वोट मिले थे। इस बार उसे सिर्फ 31.4 फीसदी वोट मिले हैं। शिवसेना को 28 और इससे थोड़ा कम वोट बहुजन विकास अघाड़ी को मिला है। यानी भाजपा से जितना वोट अलग हुआ उससे थोड़ा ज्यादा वोट शिवसेना को मिला। भंडारा गोंदिया सीट पर भी तस्वीर ऐसी ही है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 50.6 फीसदी वोट मिले थे, जो उपचुनाव में घट कर 42 फीसदी पर आ गया। इस सीट पर पिछली बार हारी एनसीपी को 38 फीसदी वोट मिले थे, जो उपचुनाव में बढ़ कर 47 फीसदी हो गया। यानी नौ फीसदी का इजाफा। वह भी तब जबकि शिवसेना ने यहां उम्मीदवार नहीं दिया था। अगर भाजपा से नाराजगी में शिवसेना ने विपक्षी पार्टियों के साथ रणनीतिक तालमेल किया या सीटों की एडजस्टमेंट की तो भाजपा को लेने के देने पड़ेंगे।

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