नागपुर: मंदिर में दान स्वरुप मिली निधि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। खास है की मंदिर में ये सब काम एक स्थानीय नेता की क्षत्रछाया में चल रहा है। मानेवाड़ा रोड स्थित बालाजी नगर में विश्वशांति मानव सेवाश्रम अंतर्गत स्थापित श्री संत गजानन मंदिर में वित्तीय अनियमितता का मामला है। मंदिर के विश्वस्त मंडल के खिलाफ धर्मदाय आयुक्त कार्यालय में शिकायत भी की गई है। शिकायत में मंदिर के अध्यक्ष और व्यवस्थापक पर दान में मिली राशि के दुरुउपयोग का गंभीर आरोप लगा है। धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में की गई शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता पांडुरंग गज्ञानदेव कहिले(68) और जनार्दन दामूजी चिखलकर (65) के अनुसार विश्वशांति मानव सेवाश्रम में 11 ट्रस्टियो की कार्यकारणी थी। जिसमे से 5 की मृत्यु हो गई 4 लोग अन्य जगह रहने चले गए बचे 2 ट्रस्टियो में से एक जिनका स्वास्थ्य इस समय ठीक नहीं है इसलिए वो काम कामकाज में सहभागी नहीं हो रहे है बचे पांडुरंग ज्ञानदेव कहिले जो मामले के शिकायतकर्ता भी है वो कामकाज में सक्रीय है।
याचिका में बताया गया है की अध्यक्ष विश्वनाथ चव्हाण की मृत्यु के बाद गुंडेराव रामाजी मोहोड(63) को अध्यक्ष बनाया गया। ट्रस्टियो की कमिटी बिना चुनाव के गठित की गई। अपनी नियुक्ति के बाद मोहोड़ ने शेषराव रेवतकर को व्यवस्थापक बना दिया। अब आरोप लग रहे है की यही दोनों व्यक्ति ही सारा कामकाज मनमानी ढंग से चला रहे है। शिकायतकर्ता का आरोप है की ये दोनों न तो संस्था के सदस्य है और न ही ट्रस्टी है।
अध्यक्ष मोहोड़ अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर मनमर्जी से दान में मिली निधि को खर्च कर रहे है। मंदिर में होने वाले विभिन्न आयोजनो में होने वाले किसी भी काम के लिए अध्यक्ष निविदा तक नहीं निकालते है। एक बार मंदिर की दानपेटी से 13 हजार 517 रूपए निकले लेकिन अध्यक्ष द्वारा इस रकम को संस्था के खाते में जमा नहीं कराया गया। दानपेटी में श्रद्धालुओं द्वारा दान किया जाता है जिसको विश्वस्त मंडल के सामने ही खोला जाता है लेकिन अध्यक्ष ने अपने कुछ लोगो के सामने इसे खोला। इस मामले को उठाने पर विश्वस्त मंडल के अन्य सदस्यों के साथ अपमानजनक व्यवहार किये जाने की वजह से संस्था के सचिव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में बताया है की दान में मिली रकम का कोई हिसाब रिकॉर्ड में नहीं है साथ ही दान में मिली रकम के साथ गैर वित्तीय व्यवहार होने का आरोप लगाया है।
राजेश नत्थूजी रहाटे ने अध्यक्ष मोहोड़ और व्यवस्थापक रेवतकर के खिलाफ सहायक धर्मादाय आयुक्त के पास याचिका दाखिल की थी। जिस पर कार्यकारी मंडल को संस्था के खाते का इस्तेमाल किये जाने का आदेश दिया गया है साथ ही संस्था की जगह के बेजा इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
जानकारी के अनुसार एक स्थानीय राजनेता का आशीर्वाद मोहोड़ और रेवतकर पर जिस वजह से यह सब काम कर रहे है। और सहायक धर्मदाय आयुक्त के आदेश के साथ महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वस्त व्यवस्था के अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है।
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