Published On : Thu, Oct 14th, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

कोयला खदानों से अवैध उत्खनन व तस्करी से सरकार को अरबों-खरबों की चपत

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नागपुर: कोल इंडिया लिमिटेड की सातों अनुसंगिक कंपनियों की कोयला खदानो से हर दिन दर्जनों ट्रक-ट्रैक्टर व पिकअप में उत्तम दर्जे का कोयला भरकर मुख्य मार्गों से गुजरते है। अवैध कोयला परिवहन के मामले मे कोयला कंपनियों के प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस कार्रवाई करने मे असमर्थ दिखाई दे रहा है।

इस संबंध में कोल इंडिया कंपनी का सतर्कता विभाग चाहे लाख दावा कर ले, लेकिन कोयले का अवैध उत्खनन व अवैध परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसका उदाहरण वेकोलि की माजरी,महाकाली,राजुरा, उमरेड,सावनेर , सिलेवाडा,बल्लारशा,वनी-नार्थ,शिवपुरी,दमुआ,जामई,डुंगरिया, खदानों की यार्डों से रात मे चोरी छिपे जमकर कोयला तस्करी शुरु है। उसी प्रकार ईसीसीएल की बिलासपुर चिरमिरी,बैकुंठपुर,विश्रामपुर,हसदेव,भटगांव,जामुन कोतमा,सोहागपुर,जोहिला, कोरबा,की खदानों तथा महानदी कोल फिल्ड अंतर्गत कुसमुःडा,दीप का,गवारा,मीरापालकी,मोड, माण्डरोयगढ कोयला खदानों कोयला तस्करी करते देखने को मिल जाएगा।जिसमे 35 खदानें मध्यप्रदेश के जिला छिन्दवाडा और बैतुल ज़िले में पाथाखेडा तथा छत्तीसगढ़ राज्य 89 कोयला खदानें तथा झारखंड में राजमहल नार्थ-कर्णपुरा,साऊथ कर्णपुरा धनबाद तथा दुर्गापुर खदाने संचालित है इन सभी खदानों के कोल यार्डों से अवैध परिवहन शुरू है।

यहाँ की कोयला खदानों तथा कोयला यार्डों से प्रतिदिन रात के समय दर्जनों ट्रक, ट्रैक्टर व पिकअप में अवैध कोयला लोड कर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सीधे डिपो व ईंट-भट्टों में पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन को जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। कोल तस्कर बेधड़क अवैध कोयला निकाल कर सीधे डिपो व भट्टों में भेज रहे हैं। राजस्व विभाग को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कोयला के अवैध कारोबार में कुछ रसूखदारों के भी नाम सामने आ रहे हैं। कोयला का अवैध कारोबार वर्षों से संचालित है।

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इसकी जानकारी राजस्व व माइनिंग विभाग को भी है, लेकिन इस पर रोक लगाने सार्थक पहल नहीं की गई। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभी गरीब तबके के साइकिल सवार ग्रामीणों से कोयले को जब्त कर लिया जाता है। कोयला का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है। इस कारोबार में एक्सीवेटर मशीन के अलावा अधिकांश पहाड़ियों पर रहने वाले जनजाति एवं आदिवासी युवाओं से अवैध खनन कराया जाता है। कोयला तस्करों की माइनिंग एवं राजस्व विभाग में मजबूत पैठ है इसलिए इनका अवैध कारोबार कभी प्रभावित नहीं होता।

सुदूर इलाके के ग्रामीणों ने बताया कि कोयला के अवैध उत्खनन के बारे में माइनिंग, राजस्व विभाग सहित संभाग के उच्चाधिकारियों को भी मालूम है।पूर्व में कई बार शिकायत की गई लेकिन उच्चधिकारियों द्वारा मामले में गंभीरता नही दिखाने से अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इसी कारण कोल तस्कर सक्रिय होकर अवैध कार्य को अंजाम दे रहे हैं।

यहां धड़ल्ले से हो रहा कोयले का अवैध खनन व परिवहन, तस्करों को मिली अधिकारियों की मौन सहमति ग्रामीणों को देते हैं इतने रुपए लोधीडांड़ व धाजागीर में अवैध कोयला खनन में लगे श्रमिकों व ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें खदान से कोयला खोदकर एक ट्रक कोयला लोड़ करने का 30 से 35 हजार रुपए, 407 वाहन में कोयला लोड करने का 8 से व 10 हजार, एक पिकअप व ट्रैक्टर में 4 से 5 हजार रुपए ही मिलता है। जबकि यही कोयला बाजार में एक ट्रक 80 से 90 हजार रुपए में बिकता है।

जो काम खनिज और पुलिस विभाग को करना चाहिए उसे कर रहे गांव के लोग, UP के 3 ट्रकों को पकड़ रहे हैं।इस संबंध मे कोल इंडिया कंपनी का सतर्कता आयोग ने गंभीरता के साथ उचित पहल की तो निश्चय ही कोयला तस्करों की नींद हराम हो जाएंगी तथा सरकार को अरबों-खरबों की इज़ाफा होगा।पंरतु कोल इंडिया कंपनी की सातों अनुसंगिक कंपनियों की खदानों के अनेक क्षेत्रीय प्रबंधक तथा प
क्षेत्रीय महाप्रबंधक-अधिकारीगण कोयला तस्करी बंद करवाने के मूड मे नही दिखाई दे रहे है।

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