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    Published On : Thu, Jun 18th, 2020
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    भेल की पेटी कंपनी ने गरीब ठेकेदार का भुगतान हडपा

    नागपुर: कोराडी विधुत परियोजना मे कार्यरत भेल अधिकारियों द्वारा उप कान्ट्रक्टर.का आर्थिक शोषण का मामला प्रकाश में आया है । न्याय न मिलने पर अन्याय ग्रस्त उपठेकेदार ने आर्थिक तंगी और कर्जबाजारी से परेशान होकर सरकार से स्वेक्षा मृत्यु की अनुमति मांगी है।जिसे लेकर महानिर्मिति मे हलचल तेज हो गई है।*

    महानिर्मिति कोराडी के पुराने विधुत संयत्र कमांक 6 का नूतनीकरण का ठेका करीबन 6 सौ करोड रुपये की लागत से भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड(भेल) को प्राप्त हुआ था। बताते हैं कि यंत्र मिशनरियों और तकनीकि कर्मियों के अभाव मे भेल के अधिकारियों ने इस कार्य का ठेका नोयडा की मेसर्सःगोल्डन ऐज इंजीनियरिंग प्रा.लि.को रुपये14.05 करोड लागत से पेटी मे दे दिया था।जिसमे पुराने संयत्र को हटाने व संयत्र नूतनीकरण के कार्यों का समावेश है।उधर भेल के पेटी कान्ट्रक्टर गोल्डन ऐज़ इंजिं.ने यह कार्य का ठेका उप ठेकेदार मेसर्सःऐपी इंजिनियरिंग वर्कस् को दिया था और ऐपी इंजी वर्कस् द्वारा युद्ध स्तर पर पुराने संयत्र को काटपीटकर हटाने का कार्य गत 2016- मे ही पूर्ण कर लिया था।

    बताते हैं कि मेसर्सःऐपी इंजीनियरिंग भागीदार सत्यदेव पटेल और मोहनदास सरजाल की ईमानदारी और कर्तव्यदक्षता को देखकर भेल तथा मेसर्सःगोल्डन ऐज इंजीनियरिंग प्रा लि के इंचार्ज के पेट मे ईर्ष्या और जलन सी होने लगी उनका मानना था कि दो-तीन- साल का कार्य को ऐपी इंजीं ने मात्र 7 महीनो मे ही पूर्ण कर लिया? आज के जमाने मे ज्यादा ईमानदारी भी कोई काम की नही है।खुन्नस की भावनाओं के आवेश में आकर भेल के पेटी कंपनी मेसर्सःगोल्डन ऐज इंजी प्रा के प्रोजेक्ट मैनेजर ने चोलकर और भेल के रविन्द्र डोंगरे ने मेसर्सःएपी इंजी वर्कस् से कार्य छीन लिया और उनको किये गये कार्यों का चुकता हिसाब भुगतान किये बिना ही यह ठेका अनुभवहीन ठेकेदार को दे दिया गया।बताते है कि कंपनी पार्टनर सत्यदेव पटेल पेशे से फिटर ट्रेड तथा मोहनदास सरजाल यह अनुभव कुशल हाईप्रेशर वेल्डर(संधाता)भी है*

    अन्यायग्रस्त गरीब ठेकेदार अपने किये कार्यों का भुगतान पाने के लिये महाराष्ट्र शासन, महानिर्मिति और भेल अधिकारियों के कार्यालयों मे डेढ साल तक चक्कर काटते निवेदन देते रहे है ।परंतु भेल के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर रविन्द्र डोंगरे और गोल्डन इंजि के इंचार्ज मशरुर टाल-मटोल जबाव देकर ऊपर वाले पर ढकेलते टाईम पास करते रहे ।जबकि भेल के कार्यपालक निदेशक सुब्रह्मण्यम ने स्वयं भेल के साईट आफिस कोराडी पंहुचकर स्पष्ट रुप से मौखिक निर्देश दिया था कि एपी इंजिं.का भुगतान जल्द करवा दिया जाये।किसी को

    इस प्रकार तंग करना ठीक नही है ।इस मौके पर भेल के पेटी कान्ट्रक्टर गोल्डन इंजि. का साईट इंचार्ज मशरुर तथा भेल के इंचार्ज रविन्द्र डोंगरे.वहां मौजूद थे।परंतु बाद मे भेल के प्रोजेक्ट मैनेजर रविन्द्र डोंगरे और गोल्डन इंजि.के इंचार्ज मशरुर ने साठगांठ के तहत भेल के कार्यपालक निदेशक सुब्रह्मण्यम के आदेश का खुल्लम-खुल्ला उलंघन कर और बेईमानी पूर्वक कमाई करके रविन्द्र डोंगरे सेवा से निवृत हो गया और गोल्डन इंजि के इंचार्ज मशरुर ने कंपनी के अन्यत्र साईट मे अपना तबादला करवा लिया।

    उधर अन्यायग्रस्त उप ठेकेदार एपी इंजि.ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, ऊर्जा मंत्री डा नितिन राऊत,गृहमंत्री अनील देशमुख प्रधान ऊर्जा सचिव व महानिर्मिति के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर न्याय दिलाने तथा न्याय न मिलने पर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है ।बताते हैं कि कर्जबाजारी और आर्थिक तंगी से मानसिक तनाव की वजह से कंपनी भागीदार मोहनदास सरजाल का गत 28अक्टूबर 2019 को बिलासपुर मे वह अपने वाहन से गिरकर बुरी तरह जख्मी हो गया था जिसका उपचारार्थ बिलासपुर मे भर्ती किया गया था बाद मे उसे धंतोली नागपुर स्थित एक निजी अस्पताल मे भर्ती किया गया था।आज भी उसका उपचार शुरु है।बारंबार निवेदन और फरियाद के बावजूद भी महानिर्मिति और भेल के अधिकारी आज भी टाल-मटोलजबाव देकर असलियत से महानिर्मिति को गुमराह कर रहे है।उधर महानिर्मिति के मुख्य अभियंता राजकुमार तासकर के अनुसार इस सबंध मे उन्होने भेल को आगाह किया है।*

    उधर भेल के प्लानिंग प्रोजेक्टर मनैजर के.के. मिश्रा के अनुसार संबंधित उप ठेकेदार एपी इंजि.यह भेल के पेटी कान्ट्रक्टर नही है फिर भी उनको योग्य न्याय के लिये संपर्क शुरु है कहकर टाल-मटोल जबाव दिया जा रहा है। जबकि गरीब उपठेकेदार सत्यदेव पटेल और मोहनदास सरजाल की माने तो महानिर्मिति के तरफ भेल का 50 करोड रुपये भुगतान बकाया है।उन्होंने जल्द न्याय न मिलने पर कानून के अनुसार इस विधुत संयत्र क्र.6 के मुख्य मालिक महानिर्मिति के मुख्य अभियंता और उप मुख्य मालिक भेल के खिलाफ मुबई उच्चन्यायालय नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर करने की बात दोहराई है।इसके लिये उन्होंने विधि न्याय प्राधिकरण को न्याय के लिये सरकार की तरफ से केश लडने के लिये अनुभव कुशल वकील मिलने के लिये ध्यानाकर्षण प्रतिवेदन तैयार कर लिया है।

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