नागपुर: देश में गैर जरूरत शहरों में मेट्रो की शुरुआत व अन्य शहरों में प्रमुख समस्याओं को दूर कर परिवहन मार्ग सुचारू रूप से करने के बजाय वहाँ भी मेट्रो का निर्माण समझ से परे है। ऐसा ही शहर है राज्य की उपराजधानी नागपुर।नागपुर में मेट्रो जरुरत से ज्यादा मनोरंजन का साधन बन के रह जाएँगी। क्योंकि मेट्रो तक पहुँचने व मेट्रो से उतरने के बाद अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने के लिए जरुरत के अनुरूप कोई पर्यायी व्यवस्था नहीं है.
मेट्रो रेल दिल्ली,मुम्बई,चेन्नई,कोलकत्ता,गुरुग्राम,बेंगलोर,जयपुर में शुरू है। इन सात शहरों में मेट्रो के 270 स्टेशन है।इन शहरों के 50 लाख यात्री रोजाना मेट्रो में सफर करते है। इनमें से सिर्फ दिल्ली,मुम्बई व कलकत्ता में मेट्रो शत-प्रतिशत सफल है,शेष 4 शहरों में खाली-पीली मेट्रो दौड़ाई जा रही है।साथ ही 15 जून को लखनऊ व 17 जून को कोच्चि में मेट्रो की शुरुआत होने जा रही है।
इसके अलावा हैदराबाद, नागपुर, विजयवाड़ा, अहमदाबाद, पुणे, ग्रेटर नोएडा में अगले 6-8 माह में मेट्रो का ट्रायल शुरू हो सकता है। इतना ही नहीं वाराणसी, मेरठ, कानपुर, आगरा, पटना, तिरुअनंतपुराम,विशाखापत्तनम, कोझिकोड, गुवाहाटी, भोपाल, इंदौर, चंडीगढ़, देहरादून-ऋषिकेश-हरिद्वार, सूरत, श्रीनगर, नासिक, ग्वालियर में सर्वे का काम जारी है।
जयपुर में प्रत्येक 3 मिनट की बजाय 15 मिनट में मेट्रो आती है,वह भी खाली-पीली। गुरुग्राम को 17%,चेन्नई को 12%,बेंगलोर को 23% यात्री रोज मेट्रो को यात्री मिल रहे है। इन बड़े शहरो के हिसाब से नागपुर को रोजाना 10% यात्री नियमित जरूरतमंद मिल जाये तो बहुत है.नागपुर में युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार और मनोरंजन का कोई साधन नहीं। रोजगार और मनोरंजन जिन शहरों में है। नागपुर के शिक्षित युवा वर्ग उन शहरों में लगातार पलायन करते जा रहे है.यहाँ रहने वाले युवाओं के लिए मेट्रो प्रति दिन शाम,प्रत्येक शनिवार,रविवार को पर्यायी मनोरंजन का साधन बन सकता है.मेट्रो के स्टशनों पर स्थानीय चर्चित,राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड के खानपान के दुकानें शुरू हो सकती है.
मोदी फाउंडेशन के अध्यक्ष महेश दयावान का सरकार से मांग है कि शिक्षित/अशिक्षित बेरोजगारों को शहरों में रोजगार/नौकरी ( मासिक कम वेतन में ) कर रोजाना अपने गांव से शहर आना और काम कर अपने गांव लौट जाना,ऐसा करने वाले के लिए मेट्रो काफी लाभदायक साबित हो सकता है. क्योंकि कम वेतन में शहर में रहना और यहाँ का खर्च वहन करना मुमकिन नहीं है.
अगर मेट्रो जीरो माइल से 45 से 60 किलोमीटर तक शुरू की जाये तो आसपास के ग्रामीण शिक्षित/बेरोजगार युवक रोजाना मेट्रो से शहर या फैक्टरी आवाजाही करेंगे। इससे गांव में व्यापार बढेंगा और गांव में युवा वर्ग रहा तो सोच भी बदलेंगी और विकसित भी होगा। इससे शहर पर भी बोझ कम, प्रशासन को भी अविकसित क्षेत्र में अवैध रूप से बढ़ती शहरीकरण पर खर्च नहीं करना पड़ेंगा। नागपुर में मेट्रो केंद्र में मोदी सरकार के कार्यकाल में आई,लेकिन तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी.यह बात और है कि मोदी सरकार के मंत्री के पहल पर राज्य के कांग्रेसी मंत्री ने राज्य सरकार से जूझकर इस परियोजना को मंजूरी दिलवाई थी.
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