Published On : Mon, Oct 7th, 2019

डागा अस्पताल में 234 शिशुओं की मौत

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नागपुर: गांधीबाग परिसर स्थित डागा अस्पताल में गत साढ़े 3 वर्ष में 234 शिशुओं की प्रसूति के दौरान मौत हो गई है. वहीं इस दौरान अस्पताल में 20,459 महिलाओं की सिजेरीयन डिलीवरी की गई. अस्पताल में नार्मल प्रसूति की संख्या में सिजेरीयन डिलीवरी का आंकड़ा 50 फीसदी से भी बढ़ने का खुलासा आरटीआई एक्टीविस्ट अभय कोलारकर ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर किया. कोलारकर ने अस्पताल प्रशासन से गत 1 वर्षों में कितने मरीज ओपीडी में आए, कितनों को भर्ती किया गया, कितनी महिलाओं की नार्मल और सिजेरीयन डिलीवरी हुई, कितने शिशुओं की मौत समेत अन्य मामलों का ब्योरा मांगा था. आंकड़ों से साफ हो गया है कि अस्पताल प्रशासन महिलाओं की नार्मल डिलीवरी करने में कितना सक्षम है.

अप्रैल 2016 से अगस्त 2019 तक इन साढ़े 3 वर्षों में डागा अस्पताल में कुल 7,18,603 मरीजों का ओपीडी में उपचार किया गया. इस दौरान कुल 1,24,143 महिलाओं को भर्ती कर 47,581 प्रसूति की गई. इसमें कुल 47,453 शिशुओं का जन्म हुआ, लेकिन कुछ कारणवश 234 शिशुओं की प्रसूति व उपचार के दौरान मौत हो गई. गत 5 माह में 21 शिशुओं की मौत हो गई है.

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50 फीसदी से अधिक हुआ सिजेरीयन का आंकड़ा
अस्पताल प्रशासन आधुनिक सुविधा से प्रसूति करने का डंका बजाता है, लेकिन वास्तविक स्तर पर सच्चाई कुछ और ही बता रही है. लगभग हर वर्ष सिजेरीयन प्रसूति का आंकड़ा 6,000 के करीब रहता है, जो कि नार्मल डिलीवरी के आंकड़ों से 100 से 200 ही कम है. इस वर्ष तो सिजेरीयन डिलीवरी का अस्पताल प्रशासन ने रिकार्ड ही तोड़ दिया है. इस वर्ष अप्रैल से अगस्त तक 5 महीनों में कुल 4805 महिलाओं की प्रसूति की गई. इसमें से 2,391 नार्मल डिलीवरी की गई और 2,414 महिलाओं की सिजेरीयन प्रसूति की गई. गौर करने की बात यह है कि 5 महीने में अस्पताल में नार्मल से अधिक सिजेरीयन डिलीवरी हुई है. इससे अस्पताल के डाक्टर व उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल निर्माण हो रहा है.

निजी अस्पतालों में सिजेरीयन की संख्या डबल

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सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा निजी अस्पतालों में सिजेरीयन से ज्यादा बच्चे पैदा हो रहे हैं. इसकी मुख्य वजह अतिरिक्त कमाई को माना जा रहा है. सामान्यत: निजी अस्पतालों में प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद डाक्टर केस को जटिल बताकर परिजनों को आपरेशन से बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्वीकारते हैं कि निजी अस्पतालों में एक तरह से केस को ज्यादा ही जटिल बताकर आपरेशन से डिलीवरी कराई जाती है. हालांकि इस पर गायनेकोलाजिस्ट का तर्क अलग है. उनका कहना है कि वे बच्चे व महिला को बचाने के लिए आपरेशन की सलाह देते हैं.

स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता के कारण संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है. जननी सुरक्षा योजना व जननी-शिशु कार्यक्रम जैसी कल्याणकारी योजनाओं के कारण महिलाएं अस्पताल में बच्चों को जन्म दे रही हैं. आंकड़ों से लगता है कि शहरी क्षेत्रों में सिजेरियन डिलीवरी सामान्य बात हो रही है. नाम ना बताने की शर्त पर रेसीडेंट डाक्टर ने बताया कि अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी बढ़ने की वजह सरकार की संस्थागत प्रसव बढ़ाने की योजनाएं भी हैं.

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