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    Published On : Sat, Feb 23rd, 2019

    अवनि शिकार क्लीन चिट मामले में नया खुलासा: जांच अधिकारी ने जानबूझकर गलत पते पर भेजा था क्लीन चिटवाला पत्र

    नागपुर: बहुचर्चित अवनि शिकार मामले में आए दिन नए खुलासे देखने मिल रहे हैं. शुरुआत से ही इस मामले का वन्यजीव प्रेमियों ने कड़ा विरोध किया है. अब एक और खुलासा सामने आ रहा है जिसमें बताया जा रहा है कि अवनि के शिकार मामले में जो क्लीन चिट शिकारी असगर अली को दी गई थी वह क्लीन चिट का पत्र यवतमाल के जांच अधिकारी ने गलत पते पर भेजी थी. पते में हैदराबाद के पुलिस उपायुक्त का नाम बिना पिन कोड के साथ भेजे जाने का खुलासा सामने आने से मामले में नया पेंच फंसने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. यह खुलासा दिल्ली की उसी वन्यजीव प्रेमी संगीता डोगरा ने किया है जिसे मामले से जुड़े सवाल सीधे वनबल प्रमुख से करने पर पुलिस के हवाले वन विभाग ने किया था. संगीता को यह जानकारी बाकायदा आरटीआई के खुलासे में दी गई है.

    बाघिन के शूटर और वन विभाग के उच्च अधिकारी यहां तक कि मंत्रियो पर भी इस मामले की आंच पहुंच चुकी थी. इस मामले में आए दिन कुछ न कुछ खुलासे करने का काम वन्यजीव प्रेमी कर रहे हैं. पांढरकवड़ा में मारी गई बाघिन अवनि के मामले में कुछ दिन पहले जानकारी सामने आयी थी की एफडीसीएम यवतमाल के सहायक प्रबंधक और जांच अधिकारी वसंत सरपे की ओर से शूटर असगर अली को क्लीन चिट दे दी गई है.

    यह क्लीन चिट का मामला अखबारों की सुर्खियों में भी छाया रहा. इसका आधार यह था कि फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच में असगर अली के खिलाफ किसी भी तरह से वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 या फिर आर्म्स एक्ट का उल्लंघन नहीं किया गया है. अली को क्लीन चिट भेजने की कॉपी हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के साथ शिकारी असगर अली को भी भेजी गई थी. लेकिन यह कॉपी पुलिस कमिश्नर को मिली ही नहीं. वन्यजीव प्रेमी संगीता डोगरा ने इस मामले में आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को फॉरेस्ट की ओर से भेजा गया पत्र मिला ही नहीं. यही नहीं भेजा गया मेल भी नहीं मिला. डाक विभाग से यह भी जानकारी डोगरा ने निकाली है कि फॉरेस्ट की ओर से पता गलत लिखा होने की वजह से पत्र वापस आया है.

    डोगरा का कहना है कि यह पत्र अवनि शिकार मामले के जांच अधिकारी वसंत सरपे ने भेजा था. डोगरा का कहना है कि इसी पत्र के आधार पर असगर अली ने क्लीन चिट की बात कही है. उन्होंने बताया कि इस मामले में पत्र जानभूझकर गलत पते पर भेजा गया है. डोगरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि वाघ झूठ बोल रहे हैं. ईमेल ( डिविजनल मैनेजर यवतमाल एफडीसीएम ) प्रफुल वाघ खुद हैं इनका मेल ID [email protected] द्वारा भेजा गया है. जो [email protected] और [email protected] को लेटर नं. 73 में सलंग्न है. लेकिन पत्र व्यव्हार में ऐड्रेस पता कुछ अलग ही है. यह गलत पत्र (संख्या 73) नागपुर टुडे के पास है, उसमे क्लीन चिट का हवाला साफ लिखा गया है. डोगरा का कहना है कि शफ़अत खान मीडिया के जरिये खुद को चालाकी से पाक साफ बताते रहे हैं और एफडीसीएम उसको फिर से बचाते हुए पकड़ा है.

    इस मामले में पांढरकवड़ा के डिवीजनल मैनेजर प्रफुल एन. वाघ से बात की गई तो उन्होंने जानकारी बताया कि वह क्लीन चिट नहीं है. जांच अधिकारी की ओर से दी गई रिपोर्ट है. सभी की रिपोर्ट अलग अलग रहती है. उनकी जांच में क्या निकला वह रिपोर्ट में है. कोर्ट में भी यह चैलेंज हो सकता है.

    वह रिपोर्ट जो है वह मेरे पास सब्मिट नहीं हुई है. हैदराबाद पुलिस को शूटर के वेपन बुलाने के लिए पत्र भेजा गया था. वह वेपन हमें नहीं मिल रहे थे. इसलिए पुलिस कमिश्नर को पत्र दिया गया था. उन्होंने वेपन लिया और उसका बैलिस्टिक करके उन्हें वापस किया. यह पूरा मामला जांच अधिकारी के अधीन है.

    इस मामले में जांच अधिकारी वसंत सरपे को संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया है.


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