Published On : Sat, Oct 8th, 2016

रायशुमारी के बाद एट्रोसिटी कानून में हो बदलाव : रामदास आठवले

Ramdas Athawale

नागपुर : केंद्रीय सामाजिक राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एट्रोसिटी कानून में बदलाव किये जाने की वकालत की है। आठवले शनिवार से चार दिनों के विदर्भ दौरे पर है इसी के तहत आज पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहाँ एट्रोसिटी कानून किसी भी सूरत में नहीं बदला जा सकता था पर हाँ इसमें बदलाव जरूर किया जा सकता है। वो खुद इस विषय पर पहल करेगे और सभी दलो के नेताओं से बात करेंगे। सन 1989 से लागू कानून को दलितों के संरक्षण के लिए बनाया गया था। मेरा भी मनना है कि दोनों पक्षो की रायशुमारी लेकर बदलाव लेकर संसद में प्रस्ताव पास करा कर नई शक्ल में एट्रोसिटी कानून को ढाला जा सकता है। यह कानून भले ही किसी के संरक्षण के लिए हो पर किसी बेगुनाह को इस कानून की सजा नहीं मिलनी चाहिए। यह कानून किसी पर अन्याय करने के लिए नहीं है बल्कि जातियो के बीच समन्वय बनाने के इरादे से लागू किया गया था। आठवले की माने तो जातियों के बीच आपसी तनाव को ख़त्म करने के लिए इंटर कॉस्ट मैरेज सबसे कारगर तरीका है। इसके प्रचार प्रसार के लिए वो योजना बनाने पर विचार कर रहा है।

आरक्षण की सीमा बढ़ा कर सबको दे फायदा
रामदास आठवले ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर शुरू आंदोलन को अपना समर्थन जाहिर किया है। उनके मुताबिक उन्होंने बहुत पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर मराठा परिवारों को आरक्षण की वकालत की थी। वो अब भी इसी मत पर कायम है। मूलतः किसानी से जुड़े मराठा समाज की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। केंद्रीय सामाजिक राज्य मंत्री ने कहाँ कि एट्रोसिटी एक्ट को रद्द करने की माँग के वो खिलाफ है। पर इस मुद्दे को’ लेकर अब विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि मराठा समाज साफ कर चुका है की वह कानून में बदलाव’ माँग कर रहे है ना कि इसे ख़त्म करने का। यह मोर्चा राजनीतिक भी नहीं है और न ही इस आंदोलन के माध्यम से दलित विरोधी भूमिका सामने आई है। आठवले ने आरक्षण की मौजूद व्यवस्था को ख़त्म आर्थिक आधार पर आरक्षण की सोच का विरोध करते है। आरक्षण का आधार सिर्फ जाति पर ही आधारित हो सकती है। इसलिए वो मनसे प्रमुख राज ठाकरे की आरक्षण संबंधी भूमिका का विरोध करते है। यह सच है कि अब देश भर में ऊँची जाति के लोग आरक्षण की माँग कर रहे है मैं इनके लिए आरक्षण की उठ रही माँग का समर्थन करता हूँ। संविधान में वर्तमान में 50 % तक आरक्षण की व्यवस्था है पर अगर सरकार चाहे तो संविधान में बदलाव कर आरक्षण की मियाद 75 फीसदी तक कर सकती है। आरक्षण का लाभ नहीं उठा रही जातियों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने में कोई परेशानी नहीं है।

रामदास आठवले आगामी 21 ऑक्टूबर को शिर्डी में दलित मराठा मैत्री सम्मलेन का आयोजन कर रहे है। जिसका मकसद मराठा समाज की माँग को समर्थन जाहिर करना और जातीय एकता को बढ़ावा देना है। इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया वो इस सम्मेलन के लिए सभी दलो के नेताओं को एकमंच पर लाने का प्रयास करेगे। अलग विदर्भ राज्य को अपना समर्थन देते हुए आठवले ने उम्मीद जताई मोदी सरकार विदर्भ की जनता की माँग जरूर पूरी करेगी।