Published On : Wed, Sep 9th, 2020

क्या करेंसी नोट देश में कोविड फैला रहे हैं ?

कैट ने सरकार से स्पष्टीकरण माँगा

नागपुर – देश में कोविड महामारी के वर्तमान गंभीर समय में जब सभी सावधानियों के बावजूद कोरोना बढ़ रहा है के मद्देनज़र कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को आज भेजे गए एक पत्र में कहा है कि अनेक रिपोर्ट के अनुसार करेंसी नोट्स कोविड सहित अन्य अनेक संक्रामक रोगों के वाहक हैं और यह बेहद चिंता का विषय है कि क्या करेंसी नोटों के जरिये कोरोना वायरस फ़ैल सकता है. कैट ने कहा की करेंसी नोट विभिन्न लोगों की एक अनजान श्रंखला के माध्यम से बड़ी संख्या में विभिन्न लोगों तक पहुँचते है, ऐसे में क्या इनके जरिये भी कोरोना फ़ैल सकता है, इसपर सरकार को एक प्रामाणिक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने सवाल करते हुए कहा की क्या करेंसी नोट संक्रामक रोगों के वाहक हैं और यदि हैं तो इससे बचने के क्या निवारक और सुरक्षा उपाय हैं, न केवल व्यापारियों के लिए बल्कि देश के लोगों के लिए भी यह जानकारी बेहद जरूरी है. जिससे मुद्रा नोटों के माध्यम से कोरोना फैलाने की किसी भी संभावना पर रोक लगाई जा सके यह इसलिए भी आवश्यक है की देश में नकद का प्रचलन ख़ास तौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रो में बहुत ज्यादा है .

भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा कि संक्रामक रोगों को फैलाने में सक्षम करेंसी नोटों का मुद्दा कुछ वर्षों से देश भर के व्यापारियों के लिए बेहद चिंता का कारण बना हुआ है और वर्तमान कोविड महामारी में देश भर के व्यापारियों में इस विषय को लेकर बेहद चिंता है क्योंकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि की गई है की करेंसी नोट संक्रामक रोगों के वाहक है. अज्ञात लोगों की श्रंखला केबीच करेंसी नोटों का लेन- देन होता है और इस कारण से विभिन्न वायरस और संक्रमणों के लिए करेंसी नोटों को बेहद घातक बताया गया है और इस तरह यह स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा दिखाई देता है. जिसके लिए यह जानना बेहद जरूरी है की क्या कोविड महामारी भी करेंसी नोटों के जरिये फैलती है.

उन्होंने कहा की कोविड वायरस बूंदों के माध्यम से फैलता है और सूखी सतह वाले किसी भी सामान के जरिये मनुष्यों तक जा सकता है. क्योंकि सूखी सतहपर कोविद वायरस काफी देर तक रह सकता है. इसलिए सूखी सतह वाले करेंसी नोटों के जरिये कोविड अथवा अन्य वायरस और बैक्टीरिया के फैलने की संभावनाओं को लेकर देश भर के व्यापारी चिंतित हैं. क्योंकि करेंसी नोटों का लेन-देन देश भर में व्यापारियों के बीच अधिक होता है और व्यापारी अथवा ग्राहक दोनों पर वायरस का असर हो सकता है .

कैट ने इस सम्बन्ध में डॉ हर्षवर्धन का ध्यान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तीन रिपोर्टों की और दिलाया है जो करेंसी नोटों को वायरस के वाहक के रूप में साबित करती हैं. इस सन्दर्भ में कैट ने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ द्वारा वर्ष 2015 के एक अध्ययन से पता चला है कि 96 बैंक नोटों और 48 सिक्कों का लगभग पूरा नमूना वायरस, फंगस और बैक्टीरिया से दूषित था जबकि 2016 में तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन में 120 से अधिक नोट डॉक्टरों, गृहिणियों, बाज़ारों, कसाई, क्षेत्रों से एकत्र किये गए. जिसमें से 86.4% नोट संक्रमण से ग्रस्त थे. वहीँ वर्ष 2016 में कर्नाटक में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट में 100 रुपये, 50 रुपये, 20 और 10 रुपये के नोटों में से 58 नोट दूषित थे.

कैट ने डॉ. हर्षवर्धन से आग्रह किया है की इस महत्वपूर्ण मुद्दे को तुरंत प्राथमिकता के आधार पर करेंसी लिया जाए और सरकार यह सपष्ट करे की करेंसी नोटों के माध्यम से कोविड सहित अन्य वायरस और बैक्टीरिया फैलते है अथवा नहीं, जिससे लोग नोटों के जरिये फैलनेवाले वाइरस से अपना बचाव कर सके.