
नागपुर: शालेय स्तर पर कला व क्रीड़ा शिक्षकों के लिए पहले की तरह स्थाई पदों की मान्यता प्रदान करने का मांग विधायक अनिल सोले ने की है। इस संबंध में सोले के नेतृत्य में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को नई दिल्ली में निवेदन सौपा गया. केंद्र शासन के आरटीई एक्ट 2009 अधिनियम के अनुसार क्रीड़ा शिक्षकों की नियुक्ति अंशकालीन निदेशक (पार्ट टाइम इंस्ट्रक्टर ) के स्थान पर स्थाई शिक्षक (फुल टाइम टीचर्स ) नियुक्त करने के बारे में विचार करने की मांग रखी गई है.
इस दौरान उनके साथ नागपुर विद्यापीठ व गोंडवाना विश्वविद्यालय के प्राचार्य, भाजपा नेता कल्पना पांडे, डॉ. श्याम पुंडे, डॉ. रेवातकर, डॉ.कोरपेनवार, डॉ पाटणकर, डॉ. शिंगरु व अन्य मौजूद थे.
विधायक सोले द्वारा दिए गए निवेदन में कहा कि केंद्र सरकार ने सन 2002 के 86वें संविधान संशोधन में प्राथमिक शिक्षा के मूलभूत अधिकार का समावेश किया था. इसके अनुसार 6 से 14 वर्ष के सभी बालकों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पारित कर भारत सरकार के राजपत्र में इस अधिनियम के अंतर्गत सम्पूर्ण भारतवर्ष में (जम्मू व कश्मीर को छोड़कर) लागू किया गया . इस अधिनियम के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने 2011 में शासन निर्णय व राजपत्र प्रकाशित कर केंद्र शासन के इस अधिनियम को अमल में लाया था. अब तक राज्य की शालाओं में भाषा, गणित विज्ञान, समाजशास्त्र आदि विषयों के साथ विद्यार्थियों के अध्यापन के लिए कला व क्रीड़ा शिक्षकों के स्थाई पद थे. लेकिन केंद्र शासन के आरटीई एक्ट के अधिनियमनुसार अब कला क्रीड़ा कार्यानुभव विषयों के लिए अंशकालीन निदेशक (पार्ट टाइम इंस्ट्रक्टर ) शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव शारारिक व बौद्धिक विकास में सहायक स्थाई क्रीड़ा शिक्षक प्राप्त नहीं होंगे. इसलिए शालेय स्तर पर क्रीड़ा शिक्षकों की नियुक्ति की मांग केंद्रीय सरकार से की गई है.
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