Published On : Wed, Jul 5th, 2017

पेड़ कटाई के नियमों में शिथिलता को लेकर पर्यावरणविदों में नाराजगी

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नागपुर
 : पेड़ों को बचाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार हर जतन के दावे करते नहीं थकती. एक पेड़ काटने पर क्षतिपूर्ति वनीकरण की कड़ी शर्त भी रखती है. लेकिन राज्य सरकार ने अपने सारे किए कराए तब पानी फेर दिया जब उसने पेड़ों को काटने के नियमों में शिथिलता ला दी. जिसे लेकर पर्यावरणविदों में नाराजी के सुर तेज होने लगे हैं.

दरअसल 2016 में महाराष्ट्र अर्बन एरिया प्रोटेक्शन एंड प्रिजर्वेशन ऑफ़ ट्री एक्ट 1975 में कुछ बदलाव किए गए हैं. जिसके कारण अब सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के साथ अन्य कार्यों के लिए पेड़ों को अपनी आवश्यकतानुसार काटने की अनुमति प्रदान कर दी. पहले पेड़ों को काटने से पूर्व सरंक्षण प्राधिकरण समिति से अनुमति लेना जरूरी होता था. कोई भी पेड़ काटने के लिए इस समिति के पास एक रिपोर्ट भेजी जाती थी. जिसके बाद इस समिति के सदस्य उस पेड़ का निरीक्षण करते थे और पता करते थे कि पेड़ को काटना आवश्यक है या नहीं. रिपोर्ट के आधार पर समिति की ओर से निर्णय लिया जाता था.

लेकिन अब नए कानून और नियम के अनुसार पच्चीस पेड़ से कम पेड़ काटने के अधिकार मनपा आयुक्त को दिए गए हैं. जबकि 25 से ज्यादा पेड़ों को काटने के लिए पेड़ प्राधिकरण समिति के अधीन मामला भेजा जाएगा. साथ ही इसके ट्री ऑफिसर को यह कार्य दिया गया है कि काटने वाले पेड़ों का मुवायना कर उसकी फोटो नागपुर महानगर पालिका को दी जाए. जिसके कारण अब पेड़ प्राधिकरण समिति का महत्व कम हो गया है. विकास के नाम पर पेड़ों को काटने के लिए राज्य सरकार ने बेहद आसान तरीका ढूंढ निकाला है. इस नियम के बनने से पेड़ों को काटने का अधिकार मनपा आयुक्त के पास होगा. जरूरत नहीं रहने पर भी पेड़ो को काटा जाएगा जिसका सीधा असर पर्यावरण पर होनेवाला है.

यह निर्णय सरकार ने ऐसे समय लिया है जब 1 से 7 जुलाई के दरम्यान राज्य भर में वन महोत्सव के तौर पर मनाया जा रहा है. इसी कालखंड में सरकार वृक्षारोपण का संकल्प आम जनता से लेती है. लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद अब इस नियम के बाद किसी की भी खाली जगह पर पेड़ काटने काटने की अनुमति मनपा आयुक्त से ले सकते हैं.

इस नियम को लेकर पर्यावरण सेवियों में नाराजी देखी जा रही है. शहर के ग्रीन विजिल फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष कौस्तुभ चटर्जी इस बदलाव का कड़े शब्दों में विरोध दर्शाते हैं. उनका कहना है कि इस नियम के कारण जिसकी जहां मर्जी होगी वह व्यक्ति वहां पेड़ों की कटाई करेगा. उनका कहना है कि पच्चीस पेड़ से कम के काटने के लिए भी ट्री अथॉरिटी के पास ही प्रस्ताव जाना चाहिए. यह भी नियम बनाया गया है कि ट्री ऑफिसर घटनास्थल पर न जाते हुए पेड़ों की फोटो भी भेजे तो काम चलेगा, जो गलत है.

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