Published On : Thu, Sep 15th, 2016

मुलायम कुनबे में घमासान के पीछे अमर सिंह! ये है अंदर की कहानी

akhilesh-7591समाजवादी पार्टी में जारी घमासान के बीच मान-मनौव्वल का दौर शुरू हो गया है. लखनऊ में सीएम अखिलेश यादव से मिलने के बाद पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने गुरूवार को कहा कि मुख्यमंत्री को बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के सरल स्वभाव का फायदा उठाते हैं. इससे पहले बुधवार को अखिलेश यादव ने कहा था कि मौजूदा संकट के लिए परिवार से बाहर का व्यक्ति जिम्मेदार है. अखिलेश ने हालांकि किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन समझा जा रहा है कि यह निशाना सांसद अमर सिंह पर था.

अमर की पार्टी में फैला रायता
मुलायम के कुनबे में जारी घमासान अखिलेश सरकार के दो मंत्रियों और फिर मुख्य सचिव के हटाए जाने के बाद शुरू हुआ. इस घटना की पृष्ठभूमि में हाल में कुछ ऐसी बातें हुईं जो इस पूरे प्रकरण के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराती हैं. दरअसल, इस फेरबदल की पटकथा रविवार रात अमर सिंह की एक पार्टी में लिखी गई थी. नई दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में आयोजित इस पार्टी में मुलायम सिंह के अलावा शिवपाल सिंह और मुख्य सचिव दीपक सिंघल भी शरीक हुए थे. इस पार्टी के लिए न्योता तो अखिलेश को भी गया था लेकिन वो नहीं आए थे.

अमर सिंह की खूब सुनते हैं नेताजी
बताया जा रहा है कि इस पार्टी के दौरान अमर सिंह ने दीपक सिंघल की मौजूदगी में मुलायम सिंह को बताया कि यूपी के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति सीबीआई के रडार पर हैं. अगर वो गिरफ्तार होते हैं तो समाजवादी पार्टी, प्रदेश सरकार और मुलायम परिवार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. अगले दिन मुलायम ने अमर सिंह और दीपक सिंघल को दिल्ली स्थित अपने आवास पर बुलाया. मुलायम के पूछने पर इन दोनों ने रात की बात दोहरा दी. इस पर मुलायम सिंह ने अखि‍लेश को गायत्री प्रजापति के साथ साथ राज किशोर सिंह का भी विभाग बदलने को कह दिया.

अखिलेश ने नेताजी के कहने पर किए फेरबदल
मंगलवार को गायत्री प्रजापति ने नेताजी से मिलकर उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि अमर सिंह और दीपक सिंघल का दावा बेबुनियाद है. प्रजापति मुलायम सिंह को अपनी बेगुनाही के बारे में आश्वस्त करने में कामयाब रहे. इसके बाद मुलायम सिंह ने दीपक सिंघल को मुख्य सचिव के पद से हटाने को कहा. बताया जा रहा है कि अखि‍लेश सिंघल से पहले से ही नाराज चल रहे थे, इसलिए उन्होंने सिंघल को तत्काल मुख्य सचिव के पद से हटा दिया और अपने पसंदीदा अफसर राहुल भटनागर को राज्य का नया मुख्य सचिव बना दिया.

अखिलेश ने नहीं सुनी नेताजी की बात
मुख्य सचिव के पद से हटाए जाने से हैरान सिंघल मुलायम सिंह के पास पहुंचे. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के बारे में उनकी कोई राय नहीं थी और वो केवल अमर सिंह को सुन रहे थे. अमर सिंह ने भी सिंघल को बहाल किए जाने की अपील नेताजी से की. इस पर मुलायम ने अखिलेश से कहा कि वो दोनों मंत्रियों और दीपक सिंघल को फिर से बहाल करें. लेकिन अखिलेश ने इस बार पिता की बात नहीं मानी. उन्होंने मुलायम को समझाया कि चुनावी मौसम में उनके इस कदम से गलत संदेश जाएगा.

मौका मिलते ही साधा निशाना
मुलायम ने अखिलेश को मनाने की जिम्मेदारी रामगोपाल को सौंपी लेकिन सीएम टस से मस नहीं हुए. इससे नाराज मुलायम ने अखिलेश से प्रदेश अध्यक्ष का पद छीनकर शिवपाल को सौंप दिया. सीएम ने पलटवार करते हुए शिवपाल से सारे अहम विभाग छीन लिए. इस तरह यूपी के सियासत में बीते 72 घंटे से मचे घमासान के पीछे अमर सिंह का हाथ बताया जा रहा है. हालांकि अमर सिंह इससे इनकार कर रहे हैं कि अखिलेश ने ‘बाहरी’ के तौर पर उनकी ओर ही इशारा किया था.

अमर की वापसी के खिलाफ थे अखिलेश
वैसे भी अखिलेश समाजवादी पार्टी में अमर सिंह की वापसी को लेकर खुश नहीं थे. सियासत के जादूगर कहे जाने वाले अमर सिंह की सपा में वापसी तो हो गई, उनके मनचाहे काम नहीं हो पा रहे थे. अपनी इमेज को लेकर संजीदा अखिलेश ने अमर सिंह को कभी हावी नहीं होने दिया. इसका दर्द कभी कभी राज्यसभा पद से इस्तीफे की धमकी तो कभी पार्टी छोड़ने की चेतावनी के रूप में बार-बार दिख रहा था.

वैसे तो अमर सिंह मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी रहे हैं लेकिन शिवपाल से करीबी की वजह से छह साल बाद पार्टी में उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ था और राज्यसभा भी भेजे गए. अखिलेश की तरह रामगोपाल भी अमर सिंह की वापसी के खिलाफ थे. इसलिए इस मामले में गुरूवार को पहली बार मीडिया के सामने आए रामगोपाल के निशाने पर अमर सिंह ही रहे.

अमर ने तोड़े कई घर!
अमर सिंह के बारे निगेटिव यह है कि वो किसी कुनबे में कलह डालने में माहिर हैं. अमिताभ बच्चन से लेकर अंबानी परिवार इसका उदाहरण है. अमर सिंह ने अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए शिवपाल से करीबी का फायदा उठाया और पर्दे के पीछे से उनके असंतोष को हवा देने में जुटे रहे. शिवपाल का असंतोष करीब साढ़े चार साल पुराना है जब विधानसभा चुनाव में सपा की जीत के बाद नेताजी ने अखिलेश को सीएम बना दिया था. उस वक्त शिवपाल ही सीएम बनना चाहते थे.