Published On : Sat, Jun 8th, 2019

सोशल मिडिया पर राष्ट्रवाद की पकड़ मजबूत : अजित पारसे, सोशल मिडिया विश्लेषक

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हार के बाद राजनितिक दलों में शुरू हुआ मंथन|

नागपुर: देश में हाल ही हुए लोकसभा चुनावो के बाद से सोशिअल मिडिया पर सभी हलकों में राष्ट्वाद की पकड़ मजबूत होने का मामला उजागर हो रहा है.चुनाव के बाद सोशल मिडिया पर होनेवाले पोस्ट भी अलग सुर में दिखाई देने लगे है. राष्ट्रवाद पर संदेह जतानेवाली पार्टियों की करारी हार देखनेको मिली, जबकि दूसरी ओर पंजाब में सेना की कारवाई ओर राष्ट्रवाद का समर्थन किये जाने के कारण ही देश भर में हारी पार्टी को यहाँ सफलता हासिल हो पाई.

जिससे सोशल मिडिया पर राष्ट्रवाद को लेकर हो रहे पोस्ट पार्टियों की सफलता काफी हद तक निश्चित करते दिखाई देने की जानकारी सोशल मिडिया विश्लेषक अजित पारसे ने दी। उन्होंने कहा की लोकसभा चुनाव में हार के बाद अब विरोधियो में इसे लेकर मंथन शुरू हुआ है। विरोधी दल की पार्टिया एक दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ने में लगी हुई है। जबकि हार के मूल कारणों तक एक भी पार्टी पहुँचती दिखाई नहीं दे रही है।

देशभक्ति की भावनाये हुई आहत
चुनाव के दौरान सोशल मिडिया के खिलाप में आये पोस्ट के कारण जनता की राष्ट्रवाद की भावनाएं आहत हुई है। जिससे विरोधी दलों को हार का करारा सामना करना पड़ा. सोशल मिडिया के माध्यम से पुलवामा घटना, उसके बाद हवाई हमले, विग कमांडर अभिनंदन के मामले पर विरोधीद्धारा संदेह जताया गया, सरकार पर एक तरह से प्रहार करते समय सेना पर ही प्रश्नचिन्ह लगानेवाले नकारात्मक पोस्ट डाले गये, देश में सेना का सम्मान जनता के लिए भावना से जुड़ा हुवा है।

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जबकि इसी मामले में नकारात्मकता फैलाई गई जिससे राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश, में सत्ता होने के बाद भी बड़ा झटका मिला है। बंगाल में भी इसी तरह का नजारा देखनेको मिला, इसके विपरीत पंजाब सीएम ने सेना परसंदेह नहीं जताया।वहाँ पर सोशल मिडिया पर सेना पर विश्वास जताया गया। जिससे देश भर में हारी पार्टी को पंजाब में सफलता हासिल हुई। सोशल मिडिया पर राष्ट्रवाद हावी होने से जाती, धर्म आदि के मुद्दे गौण हो गए।

सोशल मिडिया से जुड़े लोगो में विशेष रूप से युवा वर्ग में राष्ट्रवाद प्रखरता से दिखाई दे रहा है। लेकिन विरोधियो द्वारा इसी पर संदेह जताया गया। जिसका जवाब जनता द्वारा वोट के माध्यम से दिया गया. हालांकि गलती सुधारनेका विरोधी दल के पास मौका तो है। लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दा छोड़कर ईवीएम, पार्टी के कमजोर नेता, कार्यकर्ताओ की संख्या के आकलन पर ही ऊर्जा खर्च की जा रही है। जिससे फिर एक बार विरोधी दल नकारात्मक दिशा की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे है। अजित पारसे, सोशल मिडिया विश्लेषक।

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