Published On : Mon, Nov 13th, 2017

सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी ने वापस लिया मांसाहारी छात्रों को गोल्ड मेडल नहीं देने का फैसला

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पुणे की सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी ने मांसाहारी और शराब का सेवन करने वाले स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल नहीं देने के निर्णय पर हंगामा मचने के बाद इस फैसले को वापस ले लिया है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अरविन्द शालीग्राम ने बताया, ‘हमने विभिन्न जगहों से आपत्ति उठने के बाद इस फैसले को वापस ले लिया है। अब हम शेलार फैमिली को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को हटाने का आग्रह करेंगे।’ गौरतलब है कि कीर्तनकार रामचंद्र गोपाल शेलार उर्फ शेलार मामा के नाम पर यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल की शुरुआत की गई है, जिसके लिए यह नई कसौटी तय की गई थी।

इस मामले पर हंगामा मचने के बाद शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने हस्तक्षेप किया था। उन्होंने सभी यूनिवर्सिटी को पत्र लिख कर इस तरह स्टूडेंट्स के बीच भेदभाव करने संबंधी किसी भी स्थिति को लागू नहीं करने का निर्देश दिया था।

यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स के लिए एक अजीबोगरीब फरमान जारी करते हुए गोल्ड मेडल के लिए जारी योग्यता में कहा था कि इस गोल्ड मेडल के लिए वही स्टूडेंट पात्र होंगे जो कि शाकाहारी हैं और शराब का सेवन नहीं करते हैं।

यूनिवर्सिटी ने इस गोल्ड मेडल के लिए जो अर्हता रखी है, उसके मुताबिक स्टूडेंट 15 नम्वबर तक आवेदन कर सकते हैं। इसमें योग, प्राणायाम करने वाले स्टूडेंट्स को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है।

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