Published On : Wed, Nov 30th, 2016

मनपा कर्मचारियों पर पड़ी नोट बंदी की विपरीत मार

NMC

नागपुर: नागपुर महानगर पालिका के कर्मचारी भी इससे अछूते नहीं हैं। पहले से ही वेतन की लेटलतीफी से मनपा कर्मचारियों का जीना दुश्वार है ऐसे में नोट बंदी के कारण बैंक द्वारा कर्मचारियों को खाते से केवल एक हजार रुपए ही देने की शर्त ने दुविधा में डाल दिया है। मीडिया की दखलअंदाजी के बाद बैंक ने एक हजार के बदले 2 हजार रुपए देने शुरू किए। बावजूद इसके अपने ही खाते से बैंक के काउंटर से पैसे निकालने में नाकाम कर्मचारी नोट बंदी की समस्या से दो चार होते रहे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नागपुर महानगर पालिका कर्मचारी सहकारी बैंक लिमिटेड के मनपा मुख्यालय स्थित विस्तारित शाखा में नागपुर महानगर  पालिका के तकरीबन 2000 कर्मचारियों का सैलरी खाता है। लेकिन नोटों की किल्लत के कारण यह बैंक अपने कर्मचारियों को उनके ही खातों से एक हजार रुपए से अधिक की रकम नहीं दे रही है। बैंक के इस रवैय्ये से कई कर्मचारी आहत हुए। अक्टूबर माह का वेतन नहीं होने से रोजाना की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाते में जमा पैसों को निकालने के लिए कर्मचारी जब अपने सहकारी बैंक पहुंचे तो उन्हें एक हजार रुपए ही दिए गए। हो हल्ला होने के बाद जब मीडिया कर्मियों ने बैंक की स्थिति का जायजा लिया तो बैंक प्रबंधन ने एक के बजाए दो हजार रुपए देने शुरू किए।

इस मामले को लेकर जब बैंक के प्रभारी शाखाधिकारी किशोर विंदाने से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक से ही उनके बैंक को कम नोट मिल रहे हैं। एक दिन में कम से कम 600 से 700 कर्मचारी पैसे निकालने और जमा करने बैंक में पहुंचते हैं। 5 से 6 लाख रुपए की नकद रकम दिन भर के लिए बहुत कम पड़ जाती है। ऐसे में निधि निकालने की मियाद तय करना जरूरी थी। अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए श्री विंदाने बताते हैं कि इन सारी समस्याओं के बाद भी बैंक सैलरी एकाउंट होल्डर को प्रतिदिन 2 हजार रुपए व पेंशनधारी खाताधारक को 4 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। बैंक को अधिक नोट मिलने पर उसे उतने ही अनुपात में बढ़ाकर विड्राल लिमिट बढ़ाई जाएगी। लेकिन फिलहाल तो नोटों की किल्लत की मार खाताधारकों को भी झेलनी पड़ेगी। वैसे तो पेंशन की तिथि हर माह की 4 से 5 तारीख होती है वहीं कर्मचारी का वेतन भुगतान 15 तारीख के भीतर कर दिया जाना चाहिए। लेकिन अक्टूबर माह का वेतन भी मनपा अब तक जमा नहीं कर पाई है। ऐसी स्थिति में जब कर्मचारी अपने ही सैलरी एकाउंट में जमा पैसे जरूरत पड़ने पर निकालने पहुंचे तो उन्हें केवल हजार रुपए ही दिए गए।