नागपुर: महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (महारेरा) ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कदम उठाते हुए राज्यभर के 8,212 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें विदर्भ क्षेत्र के 483 प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनमें सबसे अधिक 391 प्रोजेक्ट्स नागपुर के हैं।
क्यों हुई कार्रवाई?
महारेरा के अनुसार, डेवलपर्स ने जनवरी से मार्च तिमाही की क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) समय पर जमा नहीं की।
यह रिपोर्ट रेरा कानून के तहत अनिवार्य है, जिसमें प्रोजेक्ट की प्रगति और वित्तीय स्थिति की जानकारी देना जरूरी होता है।
60 दिनों की मोहलत, नहीं दिया जवाब तो सख्त कार्रवाई
महारेरा ने स्पष्ट किया है कि:
- 60 दिनों के भीतर जवाब नहीं देने पर कड़ी कार्रवाई होगी
- प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है
- रजिस्ट्रेशन बहाल कराने के लिए ₹50,000 जुर्माना देना होगा
- प्रोजेक्ट के मार्केटिंग, विज्ञापन और फ्लैट बिक्री पर रोक लग सकती है
- संबंधित प्रोजेक्ट के बैंक खातों से लेन-देन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है
विदर्भ में जिलावार स्थिति
- नागपुर: 391 प्रोजेक्ट्स
- अमरावती: 135 प्रोजेक्ट्स
- चंद्रपुर: 113 प्रोजेक्ट्स
- अकोला: 12 प्रोजेक्ट्स
- बुलढाना: 10 प्रोजेक्ट्स
- वर्धा: 10 प्रोजेक्ट्स
- यवतमाल: 4 प्रोजेक्ट्स
- भंडारा: 104 प्रोजेक्ट्स
- वाशिम: 4 प्रोजेक्ट्स
क्या है QPR और क्यों जरूरी है?
स्थावर संपदा (रेरा) अधिनियम की धारा 11 और जुलाई 2022 के आदेश के अनुसार, हर डेवलपर को हर तीन महीने में अपनी वेबसाइट पर निम्न जानकारी अपडेट करना अनिवार्य है:
- कितने फ्लैट, प्लॉट या गैरेज बुक हुए
- ग्राहकों से कितना पैसा प्राप्त हुआ और कितना खर्च हुआ
- क्या प्रोजेक्ट के नक्शे (बिल्डिंग प्लान) में कोई बदलाव हुआ
ग्राहकों के अधिकार से जुड़ा मामला
महारेरा का मानना है कि:
- खरीदारों को अपने निवेश की प्रगति जानने का अधिकार है
- डेवलपर्स की लापरवाही ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन है
नियमों के अनुसार:
- ग्राहकों से प्राप्त धन का 70% अलग बैंक खाते में रखना अनिवार्य है
- फंड निकालने के लिए इंजीनियर, आर्किटेक्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाणपत्र जरूरी होता है
- यदि कोई लेन-देन नहीं हुआ तो ‘NIL रिपोर्ट’ जमा करना अनिवार्य था
लेकिन कई डेवलपर्स ने इन नियमों का पालन नहीं किया।
नागपुर में असर
इस कार्रवाई से नागपुर के रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मच गई है। बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स पर नोटिस जारी होने से बिल्डर्स पर जवाब देने और अनुपालन सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।
निष्कर्ष
महारेरा की यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो कई प्रोजेक्ट्स पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिससे खरीदारों और निवेशकों पर भी असर पड़ सकता है।








