Published On : Thu, Dec 6th, 2018

अंडर ग्राउंड हुए एसपी एसपी पाटिल, आरटीओ से मिलते हैं प्रति माह 25 लाख

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नागपुर: महिला पुलिसकर्मी द्वारा आला अधिकारियों से शिकायत किए जाने की जानकारी तो एसीबी के एसपी पी.आर. पाटिल को पहले से थी, लेकिन मंगलवार दोपहर को सदर थाने में मामला दर्ज होने की कार्रवाई शुरू होते ही अचानक पाटिल अपने कैबिन से निकल गए. तब से वो कहां है, इसकी किसी को जानकारी नहीं है. मामला दर्ज होने की भनक लगते ही पाटिल अंडरग्राउंड हो गए. उनके दोनों फोन भी बंद हैं. एसीबी कार्यालय में काम करने वाली 29 वर्षीय पीड़िता की शिकायत पर सदर पुलिस ने पाटिल के खिलाफ विविध धाराओं के तहत छेड़खानी का मामला दर्ज किया है.

सूत्रों की माने तो पाटिल दोपहर को कार्यालय से चले गए. वो कहां गए, इसकी किसी को जानकारी नहीं दी गई. बताया जाता है कि पाटिल ने छुट्टी ले ली है. अब छुट्टी मंजूर की गई या नहीं, यह पता नहीं चल पाया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज होने के कारण प्रकरण की जांच एसीपी राजेंद्र बोरावके को सौंपी गई है. जोन के डीसीपी चिन्मय पंडित ने बुधवार को पूरे प्रकरण की जानकारी ली. पुलिस ने पीड़िता का बयान भी दर्ज करना शुरू कर दिया है. डीसीपी पंडित ने कहा कि प्रकरण में 7 वर्ष से कम सजा होती है इसीलिए आरोपी को गिरफ्तार करना जरूरी नहीं है.

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निश्चित ही यह गंभीर प्रकरण है. जांच कर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. जल्द ही पाटिल को नोटिस भी जारी किया जाएगा. नोटिस तो तब मिलेगा जब पाटिल अपने घर और कार्यालय में होंगे. पाटिल कहां है, यह कोई नहीं जानता. इस मामले को एसीबी के आला अधिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया है. इसीलिए मुंबई के अधिकारियों की समिति गठित करके जांच शुरू की गई. महिला की शिकायत सही मान कर खुद डीजी कार्यालय से मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए गए.

कई तरह के प्रलोभन दिए
पाटिल ने पीड़ित महिला को लगभग 1 वर्ष से परेशान कर रखा था. वीडियो कालिंग करने के लिए मजबूर करते थे. अपने कैबिन में बुलाकर नजदीकी बढ़ाने का प्रयास करते थे. इसके लिए कैबिन के गेट पर ब्लैक फिल्म लगाई थी. इतना ही नहीं, पीड़िता को कई तरह के प्रलोभन भी दिए. परिवार को 1 करोड़ रुपये की मदद करने, कार दिलाने और पुणे में फ्लैट दिलाने तक का लालच दिया, लेकिन पीड़िता नहीं मानी. पाटिल ने पीड़िता को अपने वैवाहिक जीवन में भी परेशानी होने की जानकारी दी. बात नहीं बनने पर पाटिल ने पीड़िता के एक पुलिस इंस्पेक्टर से रिश्ता जोड़कर बदनाम करने की धमकी दी. इसके लिए विभाग में तैनात एक इंस्पेक्टर को भी जमकर प्रताड़ित किया गया.

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आरटीओ से मिलते हैं प्रति माह 25 लाख
अपनी शिकायत में पीड़िता ने कई तरह के खुलासे किए हैं. उसने बताया कि पाटिल ने अपनी कमाई के बारे में भी कई बार बताया था, जिसमें आरटीओ से प्रति माह 25 लाख रुपये मिलने की बात कही थी. इसके अलावा भी कई विभाग के लोग एसीबी को पैसा देते हैं. इससे समझ आता है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए काम करने वाले एंटी करप्शन ब्यूरो में भी कितना भ्रष्टाचार फैला हुआ है. सरकारी विभागों में कार्रवाई नहीं करने के लिए प्रति माह लाखों रुपयों की वसूली की जाती है. महिला पुलिसकर्मी को ये भी जानकारी है कि पाटिल के लिए वसूली करने वाला कर्मचारी कौन है. आरटीओ और सिटी सर्वे विभाग में लंबे समय से कोई बड़ी कार्रवाई न होना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.

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