Published On : Wed, Aug 22nd, 2018

नागपुर डायोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष और मॉडरेटर पर लाखों की हेरफेर का आरोप

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नागपुर: सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी व भास्कर बहुउद्देशीय संस्था के प्रदेश अध्यक्ष और ख्रिस्ती एकता संगठन के नागपुर अध्यक्ष अनिल भास्कर साठे ने कैथेडरथल कंपाउंड सदर नागपुर डायोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष बिशप पॉल दुपारे और मॉडरेटर पी.सी सिंह पर 2012 में संस्था के मार्फ़त 18 लाख 50 हजार रुपए की हेरफेर करने का आरोप लगाया है.

इसके पूरे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ अनिल साठे 20 अगस्त को नागपुर चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में अनशन पर बैठे थे और मांग की थी कि हेरफेर करनेवाले बिशप पॉल दुपारे पर कार्रवाई की जाए. जिसके बाद चैरिटी कमिश्नर ने खुद आकर साठे को कार्रवाई का आश्वासन दिया. साठे ने जानकारी देते हुए बताया कि ईसाई लोगों की रेजिस्टर्ड संस्था नागपुर डायोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) है.

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इस संस्था में पैसा आता है और बैंक में जमा होता है. खर्च बताकर ऑडिट रिपोर्ट तैयार होती है. इस ऑडिट रिपोर्ट में 18 लाख 50 हजार रुपए आये ही नहीं है. बिशप पॉल दुपारे और मॉडरेटर पी.सी सिंह और चर्च के लोगों ने पैसो की हेरफेर की है. यह हेरफेर वर्ष 2012 की है. उन्होंने बताया कि चैरिटी ऑफिस में सबसे ज्यादा शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. चैरिटी ऑफिस से उनकी एक अप्लीकेशन भी गायब कर दी गई.

पूरे सबूतों के साथ चैरिटी कमिश्नर ऑफिस में शिकायत की थी. उन्होंने कहा कि अनशन पर बैठने के बाद चैरिटी कमिश्नर ऑफिस द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया है कि गलत हुआ है और कार्रवाई करेंगे. इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में भी दी थी. साठे ने इस मामले की जानकारी के बारे में बताते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त, क्राइम ब्रांच और सदर पुलिस स्टेशन में भी शिकायत की गई थी.

क्राइम ब्रांच और सदर पुलिस स्टेशन की ओर से चैरिटी कमिश्नर ऑफिस से रिपोर्ट मांगी गई थी. लेकिन उन्होंने रिपोर्ट नहीं भेजी. नागपुर के मॉनसून के विधानसभा 2018 में भी यह मुद्दा साठे ने उठाया था. सूचना के अधिकार में 18 लाख 50 हजार रुपए की अफरातफरी की बात सामने आयी है.

इस पूरे मामले में साठे द्वारा लगाए गए आरोपों पर नागपुर डायोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष बिशप पॉल दुपारे से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई और उन्हें मोबाइल सन्देश भी भेजा गया, लेकिन उनकी ओर से कोई भी प्रतिसाद नहीं दिया गया.

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