Published On : Thu, Sep 7th, 2017

विवेकानंद स्मारक, अंबाझरी तालाब और रिहायशी इलाक़े के लिए ख़तरनाक

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नागपुर: अंबाझरी तालाब के किनारे नागपुर मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नया विवाद विवेकानंद स्मारक को लेकर खड़ा हो गया है। करोड़ो रूपए की लागत से बनकर तैयार हुआ यह स्मारक हैरिटेज अंबाझरी तालाब और डैम के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। ख़ास बात है की नियमों को ताक पर रखकर न सिर्फ़ स्मारक का निर्माण किया गया बल्कि नियमों को भी अनदेखा किया गया। आरटीआई द्वारा माँगी गयी जानकारी के तहत डैम सेफ़्टी ऑर्गेनाइजेशन,नाशिक की प्राप्त रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। वर्ष 2016 में तालाब के किनारे मेट्रो के निर्माण कार्य के लिए नागपुर महानगर पालिका ने डीएसओ से तकनिकी राय माँगी थी। जिसके बाद डीएसओ की टीम ने सर्वे कर अपनी राय से मनपा को अवगत करते हुए मेट्रो के काम से डैम के साथ तालाब के आसपास रिहायशी इलाकों को ख़तरा बताया था। अपने इसी सर्वे में डीएसओ ने अंबाझरी तालाब के ऑवरफ्लो पॉइंट पर बनाये गए स्मारक को ख़तरनाक करार दिया था।

नागपुर टुडे के पास मौजूद डीएसओ की सर्वे रिपोर्ट में विभाग का आकलन स्पष्ट बताता है की कैसे यह स्मारक धोखादायक है। रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहाँ गया है की डैम की दीवार मिट्टी की है और यह 146 वर्ष पुराना होने से इसके आसपास निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। इतना ही नहीं सबसे चौकाने वाली बात यह है की डैम के ओवरफ्लो पॉइंट पर स्मारक के निर्माण के लिए पर्यावरण और वन विभाग के साथ रिवर ( नदी )सेफ़्टी की भी इजाज़त नहीं ली गयी है। आरटीआई कार्यकर्त्ता और वकील सतीश मेहता द्वारा माँगी गयी जानकारी में खुद मनपा ने इस बात को क़बूल किया है की उसके पास इन विभागों की इजाज़त के किसी भी तरह के दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है। तो क्या अब ये माना जाए की स्मारक अवैध है और इसे जनता की को जान जोखिम में डाल कर बनाया गया है।

सिर्फ़ तालाब की ही सुरक्षा नहीं, सवाल यह भी है की शहर की पहचान जिस नाग नदी की वजह से है उसका उद्द्दग़म स्थल इसी अंबाझरी ओवरफ्लो पॉइंट को माना जाता है। नाग नदी के संरक्षण और पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार ने 1300 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। अब ऐसे में अगर नदी के शुरुवाती दौर में ही पानी को रोक दिया जायेगा तो इस प्रोजेक्ट पर प्रश्न उठना लाज़मी है। जिस नदी के संरक्षण के लिए 1300 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया है उसे पहले ही हैरिटेज कमेटी डीनोटिफाइड कर चुकी है। इतना ही नहीं बहते पानी को रोकना क़ानूनन जुर्म है बावजूद इसके स्मारक के सौंदर्यीकरण के लिए पानी को रोका गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश साफ़ कहता है की नदी के पानी के प्राकृतिक बहाव को रोका नहीं जा सकता।

डीएसओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है की क़ायदे से किसी भी डैम से 200 मीटर इलाके ( जमीनी सतह ) या फिर तालाब की बॉउंड्री वॉल से 10 गुना तक के इलाक़े में किसी भी तरह का निर्माण कार्य तालाब के लिए घातक है। बावजूद इसके मेट्रो और स्मारक का निर्माण कार्य किया गया।



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