Published On : Fri, May 21st, 2021

संस्कारों से व्यक्ति अच्छा बनता हैं- आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी

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नागपुर : संस्कारों से व्यक्ति अच्छा बनता हैं यह उदबोधन वात्सल्य सिंधु दिगंबर जैनाचार्य गुप्तिनंदीजी गुरुदेव ने विश्व शांति अमृत महोत्सव के अंतर्गत श्री. धर्मराजश्री तपोभूमि दिगंबर जैन ट्रस्ट और धर्मतीर्थ विकास समिति द्वारा आयोजित ऑनलाइन धर्मसभा में दिया.

गुरुदेव ने धर्मसभा में कहा – बोली बता देती है व्यवहार कैसा है, और संत बता देते हैं संस्कार कैसे हैं. बड़प्पन वह गुण है जो पद से नहीं अच्छे संस्कारों से मिलता है। अच्छे संस्कारों से व्यक्ति अच्छा बनता हैं.। संस्कारों से बड़ी वसीयत नहीं है और ईमानदारी से बडी विरासत नहीं हैं. । अच्छे बच्चे संस्कार पाकर बहुत आगे बढ़ जाते हैं। . संस्कार किसी मॉल में नहीं, परिवार से प्राप्त होते हैं. । अच्छे संस्कार माता पिता और अच्छे गुरु से मिलते हैं.और गुरुओं से अच्छे संस्कार मिलते हैं. अच्छे संस्कार हैं तो आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता.

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बच्चों को संस्कारित करने की जिम्मेदारी माता पिता की होती हैं- आर्यिका सुज्ञानश्री माताजी
आर्यिका सुज्ञानश्री माताजी ने धर्मसभा में कहा गणधराचार्य कुंथुसागरजी गुरुदेव के रत्नों का देश में कोई जवाब नहीं है । जिनका विदेश में भी प्रकाश फैला हैं. माता अपने बेटे को बादाम, केसर की घुट्टी पिलाती हैं। और यदि साथ में भी संस्कारवान बनाये. माता बच्चों को मंदिर ले जाये. बच्चों को अंगुली पकड़ कर मंदिर नहीं ले गए तो बच्चे संस्कारित नहीं होंगे। आप बच्चे को जैसे संस्कारित करेंगे वैसे ही संस्कार उनमें प्रकट होंगे. पिता की भी जिम्मेदारी होती हैं बच्चों को संस्कारित करने की ।आप जिस रूप में संतान को बनायेंगे वो उसी रूप में बनेंगे, वैसा आपको बनाना होगा.

आपको संतान को क्या बनाना हैं आप बना सकते हैं. वृक्ष को सुंदर बनाना चाहते हैं, फल को सुंदर, फूल को सुंदर देखना चाहते हैं तो उपजाऊ जमीन में बीज डाले. अच्छे फल, अच्छे फूल आयेंगे. संतान को संस्कारवान बनाये. धर्मसभा का संचालन आगमस्वरा कण्ठकोकिला गणिनी आर्यिका आस्थाश्री माताजी ने किया. धर्मतीर्थ विकास समिति के प्रवक्ता नितिन नखाते ने बताया शनिवार 22 मई को सुबह 7:20 बजे शांतिधारा, सुबह 9 बजे आचार्यश्री शशांकसागरजी गुरुदेव का उदबोधन होगा. शाम 7:15 से परमानंद यात्रा, चालीसा, भक्तामर पाठ, महाशांतिधारा का उच्चारण एवं रहस्योद्घाटन, 48 ऋद्धि-विद्या-सिद्धि मंत्रानुष्ठान, महामृत्युंजय जाप, आरती होगी.

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