Published On : Wed, Sep 18th, 2019

मां बालक की प्रथम गुरुः योगेश कृष्णजी महाराज

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नागपुर: कुलदेवी महिला मंडल की ओर से पितृपक्ष पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महोत्सव दुर्गा देवी मंदिर, नवाबपुरा, महाल में जारी है. कथा का सुंदर रसपान चित्रकूट निवासी कथाकार बाल व्यास योगेश कृष्ण जी महाराज भक्तों को करा रहे हैं. कथा का समय 3 से 6 रखा गया है।

कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास ने कहा धु्रव व प्रल्हाद चरित्र का वर्णन किया. उन्हांेने कहा कि बालक की प्रथम गुरू उसकी मां होती है. मां के सुंदर सुंस्कार ही बालक धु्रव व प्रल्हाद को बनाते हैं. सच्ची भक्ति और अटूट प्रेम के साथ कोई भी ईश्वर को अपना बना सकता है. ईश्वर और भक्त के बीच उम्र कोई मायने नहीं रखती. अगर ईश्वर और भक्त के बीच रिश्ता बन जाता है तो वे किसी भी विपत्ति में भक्त की रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति में निहित शक्ति के बारे में संक्षिप्त में बताया.

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उन्होंने कहा कि धु्रव व प्रल्हाद को भी घोर कष्टों का सामना करना पड़ा था, लेकिन कठिन दौर में भी उन्होंने भगवान के नाम का सहारा नहीं छोड़ा था. इसलिए उनका नाम आज भी उदाहरण के रूप में लिया जाता है. उन्होंने कहा कि भगवान तो सिर्फ भाव के भूखे हैं. जो भी जन उनके प्रति समर्पित भाव रखता है उनका बेड़ा पार अवश्य करते हैं. प्रभु की भक्ति करने के लिए सबसे जरूरी है उन पर अटूट विश्वास होना.

जो प्रभु पर अटूट विश्वास रख उनकी भक्ति करते हैं उन्हें प्रभु कृपा अवश्य प्राप्त होती है. भगवान पर विश्वास रख उनकी आराधना में लीन हो जाना चाहिये. वर्तमान में बच्चों में अच्छे संस्कार के लिए उन्हें भक्त ध्रुव व प्रल्हाद की कथा अवश्य सुनानी चाहिए. इससे उनमें अच्छे संस्कार जन्म लेते हैं. प्रभु की भक्ति करनी है तो इन दोनों के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए.

आज व्यासपीठ का पूजन महिला मंडल की अनिता दीक्षित, पूजा सोलंकी, माया सोनुले, सविता मेंढेकर, शोभा धोपटे, जया वारूलकर, शारदा पवार, सुनीता चैहान, रूक्मिणी राजकुमार, कंचन पवार, सरिता गहेरवार, संध्या आमदरे, जया वाघ, रूपाली नाकाड़े, ज्योति दिल्लीवाल, शालिनी मानापुरे, सविता ठाकुर, कल्याणी बैस, संजीवनी प्राणायाम, मीना बैस, शैला चंदेल, रीना राजुरकर, गायत्री कोहले, सुनीता बैस, अरूणा इटनकर, शेवंता शेंडे ने किया.

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