Published On : Fri, Dec 28th, 2018

शीतल उगले बनी नासुप्र की पूर्णकालीन सभापति

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नागपुर: नागपुर सुधार प्रन्यास की बर्खास्तगी पर राज्य के मुख्यमंत्री ने ३१ दिसंबर २०१८ को अंतिम घोषणा की थी. तो दूसरी तरफ राज्य सरकार ने पुणे मनपा की अतिरिक्त आयुक्त शीतल उगले की बदली कर नागपुर सुधार प्रन्यास का नया सभापति बना दिया.ऐसे में अर्थात प्रन्यास की बर्खास्तगी की घोषणा कोसों दूर नजर आने लगी है.

शीतल उगले पुणे मनपा की अतिरिक्त आयुक्त थी. उन्हें अब नासुप्र का मुखिया बना कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. नागपुर शहर के नियोजनबद्ध विकास करने के लिए मेट्रो रीजन की स्थापना की गई. मेट्रो रीजन का डेवल्पमेंट प्लान भी तय किया जा चुका है.

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याद रहे कि की मेट्रो रीजन की घोषणा पिछली कांग्रेस आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में किया गया था. क्यूंकि आघाडी सरकार ने कार्यकाल के अंतिम समय में घोषणा की थी इसलिए कुछ खास नहीं कर पाई. सरकार बदलते ही भाजपा प्रणीत युति सरकार ने मेट्रो रीजन का नाम बदल दिया और उसकी जगह एनएमआरडीए(नागपुर महानगर क्षेत्र प्राधिकरण ) कर दिया।

धांधली, दलाली प्रथा पर रोक लगाना टेढ़ी खीर

पुणे मनपा में कई मामलों में उगले ने पारदर्शिता लाई थी,इसलिए स्थानीय सफेदपोश नेताओं ने उसे हटाने के लिए मुख्यमंत्री से गुजारिश की थी. अब उगले को नासुप्र-एनएनआरडीए के अधिकारियों के ग़ैरकृतों पर लगाम लगाना और साथ ही साथ विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लेन के अलावा प्रशासन जनता के लिए सुलभ रखना,उगले के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती हैं.

उगले की नागपुर तबादले के लिए पुणे के भाजपाई जिद्द पर अड़े थे.पुणे मनपा के शत-प्रतिशत भाजपाई नगरसेवक उगले के तबादले के लिए हस्ताक्षर अभियान तक चला रखा था. उगले के अधीनस्त विभागों की नियमित समीक्षा बैठकें होते रहने से सम्बंधित विभाग सकते में रहता आया है.

नासुप्र की कार्यप्रणाली से जनता काफी त्रस्त है. उनकी सुनवाई नहीं के बराबर होती है. नासुप्र में टेबल दर टेबल कीमत चुकाने के बाद ही उनके प्रस्ताव को गति जरूर मिलती है, लेकिन मनमर्जी प्रन्यास के अधिकारी वर्ग की चलती है. वर्तमान में जनता के प्रस्ताव मंजूर करवाने का दर १५००० रूपए प्रति टेबल या फिर डेढ़ लाख रूपए प्रति एकड़ है. यह कारनामा नासुप्र अधिकारियों से सम्बंधित दलालों के मार्फ़त अंजाम दिया जाता है.

उक्त समस्याओं,भस्टाचार पर लगाम लगाने में प्रभारी सभापति अश्विन मुद्गल अपने अल्प कार्यकाल में सफल रहे.अधिकारियों में भी शिष्टाचार लाने में उन्हें सफलता मिली. मुख्यमंत्री ने भी मनपा,नासुप्र में शिष्टाचार लाने व भ्रस्टाचार रोकने के लिए अश्विन मुद्गल,वीरेंद्र सिंह और अब शीतल उगले को नागपुर लाया. मात्र सवा-डेढ़ साल में अश्विन मुद्गल को मनपा से हटाकर नागपुर का जिलाधिकारी बना दिया. उनकी जगह वीरेंद्र सिंह मनपा में तैनात किए गए. जिन्हें सत्तापक्ष ने लौटने पर मजबूर कर दिया. उक्त दोनों अधिकारियों को उनके सकारात्मक गुणों के लिए आज भी मनपा मियाद किया जाता है. सभी की संयुक्त मंशा थी कि वे ३-४ साल कम से कम मनपा में रहे. अब मुख्यमंत्री ने नासुप्र को ट्रैक पर लाने के लिए उगले को भेजा. अब देखना यह हैं कि नासुप्र में क्या बदलाव आता है.

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