
गोंदिया। धर्म नगरी गोंदिया सोमवार 6 जुलाई को संतों के दिव्य आशीर्वाद और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी। अवसर था पूज्य श्री सचखंड दरबार में परम पूज्य गुरुदेव बाबा प्रतापराय साहिब के रजत वर्ष वर्सी महोत्सव के शुभारंभ का। कार्यक्रम की शुरुआत झूलेलाल साईं (बहराणा साहिब) की अखंड ज्योति प्रज्वलन और साप्ताहिक पाठ साहिब से हुई। इस दौरान गुजरात से पधारे सुप्रसिद्ध संत शिरोमणि सेहरा वाले साईं जी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कृति और सनातन धर्म रक्षा का संदेश दिया।
संत श्री ने कहा कि जिस भूमि पर संतों ने तपस्या की हो, वहां स्वयं ईश्वर का वास होता है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ जो भक्त ऐसे तीर्थस्थलों पर आता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं लौटती। उनके उद्बोधन के दौरान सत्संग हॉल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए।
सिंधियत की आत्मा साईं झूलेलाल जी के नाम सिमरन में बसती है
अपने प्रवचन में संत सेहरा वाले साईं जी ने सिंध के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंधी समाज की पहचान उसके इष्टदेव भगवान झूलेलाल जी से है। उन्होंने कहा, “हम धर्म से हिंदू सनातनी हैं और जाति से सिंधी हैं। हमारी सिंधियत की आत्मा साईं झूलेलाल जी के नाम सिमरन में बसती है।”
उन्होंने बताया कि सिंध की धरती पर एक समय ऐसा भी आया जब हिंदू समाज पर अत्याचार हुए, धर्म परिवर्तन के प्रयास किए गए और समाज अस्तित्व के संकट से जूझने लगा। उस दौर में पूर्वजों ने सिंधु नदी के तट पर जाकर ईश्वर से प्रार्थना की और 40 दिनों तक कठोर तपस्या की। संत श्री के अनुसार, 41वें दिन हुई दिव्य आकाशवाणी ने समाज को नई दिशा दी और उसी आध्यात्मिक शक्ति के रूप में भगवान झूलेलाल जी का अवतरण हुआ।
“जब-जब पाप बढ़ता है, प्रभु लेते हैं अवतार”
संत श्री ने कहा कि जब धरती पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब ईश्वर स्वयं धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। भगवान झूलेलाल जी ने भी सिंधु सभ्यता, सिंधी भाषा, संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि आज सिंधी समाज जिस सम्मान और पहचान के साथ खड़ा है, उसमें झूलेलाल जी की कृपा का महत्वपूर्ण योगदान है।
गुरु, माता-पिता और सत्कर्म ही सफलता का मार्ग है ,
श्रद्धालुओं को जीवन का सार बताते हुए संत श्री ने कहा कि गुरु के बिना आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “जिस गुरु पर आपका विश्वास हो, उसका संग कीजिए। संत और महात्मा केवल मार्ग दिखाते हैं, लेकिन उस रास्ते पर चलना स्वयं मनुष्य को होता है।
उन्होंने माता-पिता की आज्ञा का पालन, सेवा, सत्कर्म और नाम-सिमरन को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति गुरु का हाथ थामता है और माता-पिता का सम्मान करता है, उसका जीवन सफल होना निश्चित है।
मनुष्य जीवन को बताया दुर्लभ अवसर
साईं जी ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है, इसलिए इसे व्यर्थ कार्यों में नष्ट नहीं करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुशासन, सेवा और भक्ति से जुड़ने का आह्वान किया। साथ ही धार्मिक परंपराओं के पालन, दीप प्रज्वलन, सेवा और श्रद्धा के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया।
12 जुलाई तक चलेगा आध्यात्मिक महोत्सव
गौरतलब है कि गोंदिया की सिंधी कॉलोनी स्थित पुज्य सचखंड दरबार में भक्ति और आध्यात्मिकता की विशेष बयार बह रही है। अखिल भारतीय सिंधु संत समाज से जुड़े करीब 20 महंत एवं संत गोंदिया पहुंच रहे हैं। आध्यात्मिक सत्संग, दर्शन, प्रवचन और भजन-कीर्तन का यह महोत्सव 12 जुलाई तक जारी रहेगा।
दरबार के गादीनशीन बाबा अमरदास उदासी, सचखंड सेवा समिति, जागृति महिला मंडल एवं सर्वसाध संगत गोंदिया ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर संतों के आशीर्वचन का लाभ लेने की अपील की है।
रवि आर्य
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