Published On : Sat, Sep 9th, 2017

पहले उत्तर प्रदेश अब महाराष्ट्र बना बच्चों की कब्रगाह, जिला अस्पताल में 55 बच्चों की मौत

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नासिक: पहले गोरखपुर, फिर फर्रुखाबाद और अब महाराष्ट्र का नासिक. बीजेपी सरकारों में जिला अस्पताल मानों नवजात बच्चों की कब्रगाह बनता जा रहा है. महाराष्ट्र के नासिक जिले के जिला अस्पताल में अभिभावक अपने नवजात बच्चों को ठीक हो जाने की उम्मीद में इलाज के लिए लाते हैं. लेकिन उन्हें जिंदा वापस नहीं ले जा पाते. ये हम नहीं बल्कि वो आंकड़े कह रहे हैं जो हाल ही में खुद सरकार द्वारा जारी किये गये हैं.

अगस्त महीने में 350 नवजात बच्चों को इलाज के लिये यहां भर्ती कराया गया था लेकिन इनमें से 55 बच्चों की मौत हो गई. सिर्फ यही नहीं बल्कि पिछले 5 महीनों में कुल 187 बच्चों की मौत हो चुकी है. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित अन्य जरूरी चिकित्सा सामान नहीं होने की वजह से बच्चों की सांसे रुक जा रही हैं. इस मामले का खुलासा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एजाज पठान का आरोप है कि नासिक के जिला अस्पताल में छोटे बच्चों के लिये जो वेंटिलेटर मशीन चाहिये वो एक भी नहीं है. कुपोषित इलाकों से जो बच्चे आते हैं, उनकी व्यवस्था नासिक शहर में कहीं नहीं होती.

कुपोषित इलाकों से बच्चें यहां इलाज के लिये आते हैं

इस अस्पताल में महाराष्ट्र के कई इलाकों से बच्चों को इलाज के लिये उनके अभिभावक लाते हैं. ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं. इस अस्पताल में सिर्फ 18 वॉर्मर है, परिजनों का आरोप है कि एक वॉर्मर में चार से पांच बच्चों को ठूंस कर रखा जाता है. इस वारदात के सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों और जिला अस्पताल के सर्जन को तलब किया है.

वहीं विपक्ष बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री से मांग पर अड़ गया है. कांग्रेस प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि करोड़ों रुपये अपने प्रचार पर मोदी सरकार खर्च करती है. लेकिन बच्चों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा नहीं मुहैया करा रहे हैं. वहीं एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि इन बच्चों की मौत के लिये बीजेपी सरकार जिम्मेदार है और स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना चाहिये.

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सरकार का दावा

वहीं बच्चों की मौत के मामले में अस्पताल से लेकर सरकार तक दावा कर रही है कि जिन बच्चों की मौत हुई है, वो पहले से ही काफी कमजोर थे और उन्हें दूसरे अस्पताल से यहां लाया गया था. अस्पताल में चिकित्सा के पर्याप्त साधन होने का दावा भी सरकार कर रही है. नासिक जिला अस्पताल के सर्जन डॉ.विनोद जगदाले के कहा कि, बच्चे कमजोर अवस्था में यहां लाये गये थे हमने बचाने की कोशिश की.

वहीं इस्तीफे की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री दीपक ने कहा की विपक्ष का काम है इस्तीफा मांगने का, लेकिन सरकार स्वास्थ्य विभाग में बहुत अच्छा काम कर रही है. सरकार चाहे अब लाख दावे कर ले लेकिन जिन माताओं की कोख उजड़ी है, वो वापस नहीं आ सकती. चिंता की बात ये है कि, इस अस्पताल में अब भी 52 बच्चे भर्ती हैं जिनमें से कुछ की हालत नाजुक है. इन मौतों को रोकने के लिये सरकार ने फौरन उपाय करने को कहा है.

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