Published On : Sat, Apr 19th, 2014

बुलढाणा जिले में 435 बालक कुपोषित

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स्वास्थ विभाग में हड़कंप 

खामगांव.

 महिला एकात्मिक बाल विकास परियोजना के अंतर्गत बुलढाणा जिले में 435 कुपोषित बालक होने की गंभीर बात सामने आई है. जिसके चलते जिला स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

सरकार बाल कुपोषण रोकने के लिए हर तरह के प्रयास कर विभिन्न योजनाए चला रही है. कुपोषण को रोकने में जिले भर की आंगनवाड़ियों में पोषक आहार वितरित किया जाता है. कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन पूरी तरह ताकत लगा रही है. फिर भी सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहे हैं.

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कुछ दिनों पहले लोणार तहसील में 31 बालक के कुपोषित होने का मामला सामने आया था. महिला एकात्मिक बालविकास परियोजना के कामकाज पर सवाल उठने लगे थे. मगर अब तो पूरे जिले भर में 435 बालक कुपोषित पाये जाने की बड़ी गंभीर समस्या प्रशासन के सामने खड़ी हो चुकी है।

कुपोषण का अर्थ 

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शिशु को दूध पिलाने के बीच अंतराल होने पर पेट में कीड़े (कृमि) दस्त और पेचीस बारबार होने, बोतल से दूध पिलाने से होनेवाले दस्त से बहुत अधिक मत्रा में बहुत पतला दूध पिलाने से, दूध में चीनी बहुत कम होने पर या न होने पर, ऊपरी आहार समय पर और पर्याप्त मात्रा में न देने से, और माँ के कुपोषित होने पर भी बालक कुपोषित हो सकता है. अधिकतर कुपोषण गर्भावस्था में ही शुरू होता है. वैसे तो बच्चे 6 माह तक दूध पीते हैं तो ठीक लगते हैं. उसके बाद उनके लिए स्तनपान पर्याप्त नहीं होता. ऐसे में पूरक आहार संबंधी सलाह ली जानी चाहिए.

दी जा रही  दवाइयां 

बुलढाणा जिले में 435 बालकों को कुपोषण होने की पृष्टि करते हुए महिला एकात्मिता विकास के डेप्टी सीईओ डी डी कहाले ने कहा कि जिले भर में किशोरियों को पहले से पोषक आहार दिया गया है. मगर पिछले वर्ष से सरकार ने उसे बंद कर दिया था. अब इस महीने से दोबारा शुरू हुआ है. कुपोषित बालकों को 1 माह तक अच्छा आहार देकर स्वस्थ्य विभाग की सहायता से उनका वजन कर दवाई दी जा रही है.

कुपोषण के मानक 

कुपोषित की पहचान के लिए उम्र के अनुसार यह मापदंड सर्वाधिक प्रचलित है. लगभग 40 बच्चे उम्र की अपेक्षा से हलके होते हैं. नवजात शिशु 3 किलो, 6 महीने के अंत में 6 किलो, 1 वर्ष के अंत में 9 किलो, 2 वर्ष के अंत में 12 किलो, 3 वर्ष के अंत में 14 किलो तथा 4 वर्ष के अंत में 16 किलों का बालक को होना चाहिए. उम्र की तुलना में इससे कम वजन होने पर डॉक्टरी सलाह जरुरी है.

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