Published On : Thu, Jun 14th, 2018

43 साल बाद महाराष्ट्र के मीसा बंदियों को पेंशन

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CM Fadnavis

देश में 1975 से 1977 के दौरान लगे आपातकाल में मीसा कानून के तहत जेल भेजे गए लोगों को महाराष्ट्र सरकार ने पेंशन देने के फैसले पर मुहर लगा दी है। इस मामले पर फैसला लेने के बनाई गई मंत्रिमंडलीय उप समिति की बुधवार को बैठक हुई। जिसमें मीसा बंदियों को पेंशन देने के फैसले पर मुहर लगाई गई।

इतनी मिलेगी पेंशन
मंत्रिमंडल की उप समिति ने फैसला लिया है कि आपातकाल के दौरान एक महीने से ज्यादा कारावास भोगने वाले लोगों को हर माह 10 हजार रुपये पेंशन दी जाएगी और एक महीने से कम समय तक कारावास भोगने वालों को पांच हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी। इतना ही नहीं पेंशन पाने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को क्रमश: पांच हजार रुपये और ढाई हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी। बताया गया है कि इस बारे में शासन आदेश जल्दी ही जारी होगा। इसके बाद पेंशन पाने के इच्छुक लोगों को कलेक्टर कार्यालय से ही इस योजना की पूरी जानकारी मिल सकेगी।

ऐसे मिलेगी पेंशन

मंत्रिमंडल उप समिति ने पेंशन पाने के लिए जो नियम और शर्तें तय की हैं, उसके मुताबिक आपातकाल के दौरान कारावास भोगने वाले व्यक्ति को पेंशन पाने के लिए कलेक्टर के पास आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ उन्हें मीसा बंदी होने का शपथ पत्र भी जोड़ना होगा। उसके बाद कलेक्टर कार्यालय आवेदनकर्ता के दावे की उपलब्ध रिकॉर्ड से जांच करेगा। तत्पश्चात पेंशन के लिए पात्र पाए गए लोगों के नामों की सूची सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी। जिन लोगों के नाम सूची में होंगे पेंशन की रकम सीधे उनके बैंक खाते में जमा होगी।

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क्या था मीसा कानून

25 जून 1975 की आधी रात देशभर में एक अध्यादेश के बाद आपातकाल लगा दिया गया। इस दौरान संविधान के अनुसार दिए गए नागरिक अधिकारों को निलंबित किया गया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण कानून समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत में 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने का नियम शिथिल हो गया। इंदिरा गांधी ने मीसा कानून में तहत एक लाख सत्ता विरोधियों को जेल ठूंस दिया। मीसा कानून का पूरा नाम ‘मेनटिनेंस ऑफ इंटरनल सिक्युरिटी ऐक्ट’था। इस कानून के तहत हुई गिरफ्तारी को अदालत में भी चुनौती नहीं दी जा सकती थी।

इस दौरान मीसा कानून के तहत बंदियों को मीसाबंदी कहा जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी, चंद्रशेखर, शरद यादव और लालू प्रसाद सरीखे नेता इसी कानून के तहत जेल में रहे थे। 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आते ही उन्होंने इस कानून को रद्द कर दिया। भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मीसाबंदियों को पहले से ही स्वतंत्रता सेनानियों की तरह पेंशन दी जा रही है।

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