Published On : Sat, Jun 29th, 2019

पुणे में बारिश में बड़ा हादसा, 20 फुट ऊंची दीवार गिरने से 17 मरे; 2 जख्मी

महाराष्ट्र के पुणे शहर में शनिवार (29 जून, 2019) तड़के बड़ा हादसा हो गया। बारिश के चलते कोंढवा के तालाब मस्जिद इलाके में एक सोसायटी की लगभग 20 फुट ऊंची दीवार गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग बुरी तरह जख्मी हुए। सूचना पर आनन-फानन मौके पर एनडीआरएफ, पुणे दमकल विभाग और नगर निगम की टीमें पहुंचीं। रेस्क्यू टीम ने इसके बाद घायलों को फौरन नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जबकि कुछ टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।

टीवी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 से अधिक लोगों के अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। दरअसल, सोसायटी की दीवार मजदूरों के शेड के ऊपर गिरी थी। शुरुआती जांच की मानें तो पुणे और आसपास के इलाके में 48 घंटे से हो रही बारिश को इसके पीछे मुख्य वजह बताया गया है।

कहा गया कि आवासीय सोसायटी में निर्माण कार्य हो रहा था और उसके पास ही मजदूरों के रहने के लिए अस्थाई घर (शेड) बनाए गए थे। बारिश के दौरान पार्किंग से सटा इमारत का हिस्सा अचानक गिरा, जिसके बाद यह घटना हुई थी।


पुणे के जिला कलेक्टर नवल किशोर राम ने ‘एएनआई’ से इस बाबत कहा, “दीवार भारी बारिश के चलते गिरी है। इस हादसे के साथ ही कंस्ट्रक्शन कंपनी की अनदेखी का मामला भी प्रकाश में आया है। 15 लोगों की जान जाना छोटी बात नहीं है। उनमें से अधिकतर मजदूर बिहार और बंगाल के थे।

सरकार मृतकों के परिजन और पीड़ितों को मदद मुहैया कराएगी।” वहीं, पुलिस कमिश्नर के.वेंकटेशम ने समाचार एजेंसी को बताया- हमारी टीम हादसे के पीछे का कारण ढूंढ रही है। जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम जांच करेंगे कि वहां निर्माण कार्य के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या सही सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे?

मुंबई के चेंबुर इलाके में भी देर रात ऑटो रिक्शा पर दीवार गिर गई। हालांकि, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। फिलहाल रेस्क्यू टीम ने वहां मलबा हटा लिया है। इसी बीच, मौसम विभाग ने कोंकण और मुंबई इलाके में अगले चार दिनों तक भीषण से बहुत भीषण बारिश होने की आशंका जताई है।

इससे पहले, मुंबई में पहली बारिश से शहर के हालात प्रभावित हुए। करंट से तीन लोगों की जान चली गई, जबकि कई जगहों पर यातायात पर बुरी तरह असर पड़ा। बेस्ट की कई बसों के रूट बदले गए, जबकि ट्रेनों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला।