7 सालों में 3 लाख हेक्टेयर जंगल खाक, करोड़ों का नुकसान
साकोली : गर्मी के दिन शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी शुरू हो जाती हैं, जिसमें हजारों एकड़ जंगल जलकर खाक हो जाते हैं. इसमें वन विभाग को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ता है. बावजूद इसके वन विभाग को हर साल लगनेवाली आग पर काबू पाने में सफलता नहीं मिली है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले 7 सालों में आग की 22,633 घटनाएं हुईं, जिसमें करीब 3 लाख हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया. आग में जंगल के छोटे -मोटे पेड़ों के अलावा मूल्यवान वनौषधियां भी नष्ट हो गईं.
वन विभाग गर्मी के दिनों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए अनेक योजनाएं बनाता है. इस पर लाखों रुपए खर्च भी किए जाते हैं. जंगल में जलन – रेखाएं बनाई जाती हैं और वनक्षेत्र के छोटे – छोटे हिस्से किए जाते हैं. अग्निरक्षक की तैनाती की जाती है. गश्त बढ़ाई जाती है. बावजूद इन सब उपायों के हर साल आग लगने की घटनाएं पिछले साल की तुलना में बढ़ ही जाती हैं.
क्या हुए अदालत के निर्देश
जंगल में लगने वाली आग और उससे होने वाले नुकसान को लेकर कुछ साल पहले उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. हाईकोर्ट ने जंगल में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे. मगर अदालत के निर्देशों पर अब तक अमल नहीं हो पाया है.
सरकार ने बनाई कमेटी
राज्य के वन मंत्री ने 7 अप्रैल 2005 को नागपुर में वरिष्ठ वन अधिकारियों की एक बैठक में वन क्षेत्र के लिए तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य संरक्षक ज्वालाप्रसाद की अध्यक्षता में वन – आग प्रतिबंधक समिति का गठन किया था. इस समिति ने वन विभाग को कुछ सिफारिशें दी थीं, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पाया.
बढ़ती ही रहीं आग लगने की घटनाएं
2007 में आग लगने की घटनाएं – 2831. जंगल जलकर खाक – 45,124.65 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 35. 47 लाख.
2008 में आग लगने की घटनाएं – 3103. जंगल जलकर खाक – 48,448.31 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 59.90 लाख.
2009 में आग लगने की घटनाएं – 3870. जंगल जलकर खाक – 53,993.24 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 27.99 लाख.
2010 में आग लगने की घटनाएं – 2362. जंगल जलकर खाक – 31,513.92 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 13.33 लाख.
2011 में आग लगने की घटनाएं – 2930. जंगल जलकर खाक – 35,966.23 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 17.12 लाख.
2012 में आग लगने की घटनाएं – 4824. जंगल जलकर खाक – 73,099.85 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 31.36 लाख.
2013 में आग लगने की घटनाएं – 2713. जंगल जलकर खाक – 14,354.04 हेक्टेयर. सरकार को नुकसान – 63.62 लाख.
70,125 हेक्टेयर जंगल अतिक्रमण की चपेट में
दूसरी ओर वन विभाग के लिए जंगल की सुरक्षा भी एक गंभीर विषय बना हुआ है. राज्य सरकार और वन विभाग वन -क्षेत्र बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर 100 करोड़ पौधों का रोपण करने का दावा कर रहे हैं, परंतु दूसरी ओर राज्य में 70,125 हेक्टेयर जंगल अतिक्रमण की चपेट में है, मगर इन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है. बताया जाता है कि नागपुर, नासिक, मुंबई, पुणे और मेलघाट के वन – क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2005 – 2006 में 41,450 हेक्टेयर क्षेत्र पर अतिक्रमण किय गया था. 2011 – 2012 में यह अतिक्रमण बढ़कर 88,142 हेक्टेयर हो गया. सितंबर 2013 तक यह अतिक्रमण बढ़कर 70,125 हेक्टेयर तक पहुंच चुका था.
अवैध वन-कटाई भी बड़ा संकट
वन – विभाग के समक्ष एक और संकट है और वह है अवैध वन-कटाई का. इससे वन क्षेत्र तेजी से काम हो रहा है. पर्यावरण की दृष्टि से यह एक बड़ा खतरा है.
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