तुमसर.
ग्रामीण भागों में किसान खेती के कामों में उलझे रहते हैं, इसलिए पुरातन काल से ही किसान वर्ग मनोरंजन के लिए शंकर पट का आयोजन बड़े उत्साह से करता है। ये आयोजन मनोरंजन के साथ साथ मिलने मिलाने का ही समय रहता है।
पट पर बंदी से किसानों में अशंतोष है और उनकी माने तो ये पट आयोजन बैलों को बचाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। किसानों का कहना है की पट पर बंदी लगाने से बेहतर होगा की कत्लखानों को बंद किया जाए। किसानों के मुताबिक़ बैल जोड़ों को भगाने के लिए तुतारी का इस्तेमाल किया जाता है ये सौ फीसदी सच है लेकिन ये भी उतना ही सच है की उन बैलों को अनेक प्रकार की खुराक और पोषक आहार देकर मज़बूत बनाया जाता है।
पट के शौक़ीन बैलों के जोड़ों का बहुत ख़याल रखते है, उनका पालन पोषण करते है। हष्ट पुष्ट बैल जीते इसके लिए ख़ास ख़याल रखा जाता है। अगर पट पर बंदी आई तो किसान बैल के जोड़ों का पालन पोषण धीरे धीरे बंद कर देंगे और हर काम ट्रैक्टर या मशीन से किया जाने लगेगा।
वैसे भी गावों में भी बैलों की संख्या काम होती जा रही है। ऐसा समय भी आ सकता है की खेतों में जुताई के लिए भी बैल नहीं दिखें।
पट पर लगी बंदी को हटाने की मांग किसान की ओर से की जा रही है।

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