चिमूर

बारह्वी व दसवी के नतीजों में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता लाने का प्रयास शिक्षण विभाग की ओर से किया जा रहा है. पासवर्ड के तौर पर माँ का नाम अनिवार्य किया गया है जिससे शैक्षणिक कागज़ादों में पिता के नाम का इस्तेमाल करने के आदी हो चुके विद्यार्थियों को अब प्रक्रिया के अंतर्गत माँ का नाम इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा.
शिक्षण विभाग की ओर से की गई ये पहल सिस्टम में पारदर्शिता लाने में काफी हद तक सफल साबित हुई है. नतीजे देखने के लिए केंद्र क्रमांक व रोल नंबर का इस्तेमाल किया जाता था जिससे कोई भी इनके माध्यम से परिणाम देख सकता था इसलिए इसपर अंकुश लगाने के लिए शिक्षण विभाग ने ये कदम उठाया और रिज़ल्ट देखने के लिए विद्यार्थी को अपनी माँ का नाम पासवर्ड के तौर पर इस्तेमाल करना अनिवार्य किया जिससे प्रक्रिया में गड़बड़ियों को कम किया जा सके. इस प्रक्रिया से न सिर्फ गड़बड़ियों में कमी आएगी बल्कि विद्यार्थियों को माँ का महत्व भी समझाने का उद्देश्य भी पूरा होगा. शिक्षण मंडल ने इसके लिए एक नए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया था.
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