Published On : Fri, Jun 6th, 2014

चंद्रपुर : वेकोलि ने दिखाया सरकार को ठेंगा

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6 माह बाद भी चंद्रपुर बिजलीघर को मिल रहा राखमिश्रित कोयला


मशीनें हो रहीं ख़राब, बिजली उत्पादन पर भी विपरीत परिणाम

चंद्रपुर (प्रशांत विघ्नेश्वर)

maha aushanik vidut kendrn
तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी के चलते राज्य को एक बार फिर लोडशेडिंग के संकट से दो-चार होना पड़ रहा है. राज्य के बिजलीघरों को गुणवत्तापूर्ण कोयला नहीं मिलने के कारण इस संकट के और बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है. चंद्रपुर के ताप बिजलीघर में भी राखमिश्रित कोयले की आपूर्ति बदस्तूर जारी है. बिजलीघर के मुख्य अभियंता राजू बुरडे ने साफ कहा कि इसका विपरीत परिणाम बिजली के उत्पादन पर भी पड़ रहा है.
याद रहे, पिछले साल दिसंबर में हुई एक विशेष बैठक में उपमुख्यमंत्री ने गुणवत्तापूर्ण कोयले की आपूर्ति करने का निर्देश वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) को दिया था, लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है.

चंद्रपुर ताप बिजलीघर में 7 सेट कार्यरत
चंद्रपुर जिले में विपुल मात्रा में कोयला उपलब्ध होने के कारण ही 1983 में यहां ताप बिजलीघर शुरू किया गया था. फिलहाल इस बिजलीघर में 7 सेट कार्यरत हैं, जिसमें 2340 मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य तय है. लेकिन आज तक इस लक्ष्य को कभी भी हासिल नहीं किया जा सका. इसके चलते राज्य के बिजली संकट के लिए इस केंद्र को ही जिम्मेदार ठहराया गया. आज की तारीख में यहां 1800 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. ट्यूब लीकेज के कारण तीसरे क्रमांक का सेट बंद पड़ा है.

कोयला आपूर्ति करार का भी उल्लंघन
सरकार ने बिजलीघर के लिए कोल इंडिया की विभिन्न कंपनियों के साथ कोयला आपूर्ति करार किया था. इसमें वेकोलि कंपनी सबसे आगे थी. यहां के ताप बिजलीघर के लिए जी-9 स्तर के कोयले की आवश्यकता थी, लेकिन इस स्तर के कोयले की आपूर्ति आज भी नहीं की जा रही है.

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चीख-पुकार के बाद बैठक
इस संबंध में खूब चीख-पुकार मचने के बाद स्थानीय विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने इस मामले को उठाया और बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छे दर्जे के कोयले की आपूर्ति के लिए अभियान चलाया. इस अभियान के फलस्वरूप उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में विधानसभा कामकाज सलाहकार समिति कक्ष नागपुर में बैठक आयोजित की गई. वेकोलि के अधिकारी, राजस्व सचिव, प्रधान सचिव (ऊर्जा) की मौजूदगी में हुई बैठक में महानिर्मिती के व्यवस्थापकीय संचालक को भी बुलाया गया. बैठक में चर्चा का केंद्र यह रहा कि वेकोलि द्वारा राज्य के बिजलीघरों को कम कोयले की आपूर्ति की जाती है, जबकि अन्य राज्यों को ज्यादा कोयले की आपूर्ति की जाती है. महानिर्मिती के व्यवस्थापकीय संचालक ने कहा कि कोयला आपूर्ति करार का 59 प्रतिशत कोयला वेकोलि से मिलता है, जबकि अन्य राज्यों को वेकोलि 110 से 115 प्रतिशत कोयले की आपूर्ति करता है. इससे नाराज उपमुख्यमंत्री ने वेकोलि के अधिकारियों को दो-टूक कहा कि दिसंबर 2013 से वेकोलि महानिर्मिती कंपनी को शत-प्रतिशत कोयले की आपूर्ति करे.

कीमतों पर भी चर्चा
इसी बैठक में कोयले की कीमतों पर भी चर्चा हुई. बैठक में बताया गया कि वेकोलि की कीमतें सरकार द्वारा अधिसूचित कोयले की कीमतों से 44 फीसदी अधिक हैं. साथ ही वेकोलि से महानिर्मिती को मिलनेवाला कोयला भी निम्न दर्जे का होता है. बैठक में फैसला किया गया कि वेकोलि कोयला आपूर्ति करार की शर्तों के मुताबिक महानिर्मिती को कोयले की आपूर्ति करेगा. तय यह भी हुआ कि महानिर्मिती कंपनी केंद्रीय विद्युत आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोयले का आयात कर सकती है.

फिर कौन लगाए लगाम ?
उपमुख्यमंत्री ने राखमिश्रित कोयले के मामले को गंभीरता से लेते हुए वेकोलि को निर्देश दिया था कि चंद्रपुर के बिजलीघर को कम राख के कोयले की आपूर्ति की जाए. बिजलीघर के मुख्य अभियंता राजू बुरडे ने कहा कि 6 महीने की अवधि बीतने के बाद भी वेकोलि के चंद्रपुर बिजलीघर को दिए जानेवाले कोयले की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आया है. बुरडे का सवाल था-अगर वेकोलि सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करता है तो फिर उस पर लगाम कौन लगाएगा ?

Mungantiwar जरूरत जी-9 की, मिल रहा जी-11, जी-12
चंद्रपुर ताप बिजलीघर को हर माह वेकोलि से 6 लाख मेट्रिक टन, एमसीएल से 2 लाख मेट्रिक टन और एसीसीएल से 60 से 70 हजार मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति की जाती है. इसमें अधिकांश कोयला वेकोलि द्वारा दिया जाता है. महानिर्मिती को जी-9 दर्जे के कोयले की जरूरत है, लेकिन उसे फिलहाल जी-11, जी-12 दर्जे के कोयले की आपूर्ति की जाती है. बिजली उत्पादन पर इस कोयले का विपरीत असर पड़ रहा है. इस कोयले से मशीनों में घर्षण और चालू मशीनों का बंद होना आम बात है. बुरडे ने बताया कि पिछले साल जिस दर्जे के कोयले की आपूर्ति की जा रही थी उससे भी घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति इस साल हो रही है. सरकार को इस तरफ विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए.

सरकार गंभीर नहीं, सीएमडी गर्ग को बर्खास्त करें : मुनगंटीवार
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि महानिर्मिती को कोयले की आपूर्ति का मामला बार-बार उठाए जाने के बाद भी सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है. उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी महानिर्मिती को घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति करना बेहद गंभीर बात है. बार-बार निर्देश के बावजूद अगर वेकोलि घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति करता है तो वेकोलि के सीएमडी गर्ग को बर्खास्त करना जरूरी है. उन्होंने इस मामले को फिर से विधानसभा में उठाने की बात कही.

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