Published On : Tue, Aug 12th, 2014

चंद्रपुर : बिजली कंपनियों को रिजेक्ट कोल की आपूर्ति धड़ल्ले से जारी


आर्यन कोल वॉशरी ने किया वेकोलि के ठेके का दुरुपयोग

(प्रशांत विघ्नेश्वर)

चंद्रपुर

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चंद्रपुर जिले की अनेक कोल वाशरीज बंद हो चुकी हैं, मगर राजुरा परिसर स्थित आर्यन कोल वाशरी अब भी चल रही है. यह भले ही खुशी की बात हो, मगर बताया जाता है कि कंपनी वेकोलि द्वारा दिए गए एक ठेके का खुलेआम दुरुपयोग कर रही है. विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसी ठेके के माध्यम से यह कंपनी कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) को ‘रिजेक्ट कोल’ की आपूर्ति कर रही है. इससे कंपनी को भले ही करोड़ों रुपयों का फायदा हो रहा हो, लेकिन केपीसीएल को जरूर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस पूरे मामले की अब गहराई से जांच करने की मांग उठने लगी है. इस कंपनी की 50 से अधिक रेल वैगन वाली एक रैक 9 अगस्त को बिलासपुर से आने के बाद उसमें बल्लारपुर एरिया का कोयला ऊपरी सतह में भरकर रविवार 10 अगस्त की रात केपीसीएल को भेजा गया है.

बिना कोयला वॉश किए बिजली कंपनियों को सप्लाई
कुछ साल पहले बिजली उत्पादन करनेवाली कंपनियों को धुला (वॉश) हुआ कोयला सप्लाई करने की योजना बनाई गई थी. इसके पीछे उद्देश्य यह था कि इस कोयले से विद्युत उत्पादन में वृद्धि होगी. इसके चलते अनेक कोल वॉशरीज खुल गई. चंद्रपुर जिला भी इसमें पीछे नहीं रहा. लेकिन धुला हुआ कोयला सप्लाई करने के बावजूद विद्युत उत्पादन में कोई खास वृद्धि नहीं दर्ज की गई. बिजली कंपनियों को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ा. जब बहुत शोर मचा तो इस कोयले की जांच की गई. पता चला कि कोल वॉशरीज बिना कोयला वॉश किए ही बिजली कंपनियों को भेज रहीं थी.

कोयला परिवहन का ठेका मिला
इसका परिणाम यह हुआ कि महाजेनको ने कोल वॉशरीज से कोयला लेना बंद कर दिया. चूंकि इस धंधे में लाभ बहुत था, इसलिए अनेक वॉशरीज काम पाने के लिए भागदौड़ करतीं रही. ऐसे में ही आर्यन कोल वॉशरी को वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (वेकोलि) ने एक ठेका दे दिया, लेकिन यह ठेका कोयले के परिवहन का था. कंपनी को
बल्लारपुर कॉलरी एरिया की सास्ती और गोवरी खानों से 15-15 हजार टन कोयला उठाकर कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भेजना था. बताया जाता है कि कंपनी ने बस इसी का फायदा उठाया.

केपीसीएल के अधिकारियों की मिलीभगत
बताया जाता है कि आर्यन कोल वॉशरी कंपनी की एक कोल वॉशरी छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर के निकट गेवरा (ग्रेवरा) में भी है. इसी कोल वॉशरी का रिजेक्ट कोल रेल वैगन द्वारा राजुरा से सटे पांढरपवणी स्थित रेलवे साइडिंग पर लाया गया. यहीं से कुछ दूर आर्यन कंपनी की कोल वॉशरी है. इस कोल वॉशरी का कोयला भी इसी साइडिंग से लोड किया जाता है. लेकिन, रविवार को ग्रेवरा से आई रैक में भरा रिजेक्ट कोल कुछ मात्रा में रेलवे साइडिंग पर खाली किया गया और उसी में केपीसीएल के लिए आए कोयले में से कुछ कोयला रैक में भर इस रैक को केपीसीएल के लिए बेंगलुरु भेज दिया गया. कोयला व्यापारियों में यह चर्चा जोरों पर है कि आर्यन कोल वॉशरी अपनी कंपनी का रिजेक्ट कोयला केपीसीएल को भेज रही है. कंपनी इससे खूब मुनाफा कमा रही है. बताया जाता है कि इस गोरखधंधे में केपीसीएल के कुछ अधिकारियों का भी हाथ है.

Raja Khanयह राष्ट्रीय संपत्ति की लूट, जांच की जाए : राजा खान
हालांकि, कोल वॉशरीज द्वारा बिजली कंपनियों को घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति कोई नई बात नहीं है. चंद्रपुर की गुप्ता कोल वॉशरी का नाम इस मामले में सामने आ चुका है और अब मामला अदालत की चौखट में है. आर्यन कोल वॉशरी का मामला भी कुछ इसी तरह का है. कोल वॉशरीज के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाले राष्ट्रवादी जनकल्याण अन्याय निवारण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा खान ने कहा है कि आर्यन कोल वॉशरी न सिर्फ वेकोलि बल्कि, केपीसीएल की आंखों में भी धूल झोंक रही है. उन्होंने इसे राष्ट्रीय संपत्ति की लूट बताते हुए इस मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है.

स्टेशन मास्टर ने जानकारी देने से किया मना
पांढरपवणी में कोयले की आवाजाही के लिए सेंट्रल रेलवे ने स्टेशन बनाया है. अनेक कर्मचारी यहां काम करते हैं. स्टेशन मास्टर से फ़ोन पर संपर्क करने पर उन्होंने साफ कहा, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती. उन्होंने रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी से बात करने की सलाह दी, मगर उसका फ़ोन अथवा मोबाइल नंबरदेने से मना कर दिया.

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