शिकारियों की ख़ैर नहीं, मचान भी तैयार
चंद्रपुर
गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी पानी के लिए भटकते रहते हैं. इसी का फायदा शिकारी उठाते हैं. अब वन विभाग वन्य प्राणियों की सुरक्षा की दृष्टि से सतर्क हो गया है. इसके लिए वन विभाग अब जिले के कृत्रिम और प्राकृतिक जलाशयों पर कड़ी नजर रखेगा.
12 प्रादेशिक वन विभाग कार्यालय
राज्य में 41,272 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जंगल फैला है. इसमें नागपुर, औरंगाबाद, धुले, नासिक, कोल्हापुर, ठाणे, अमरावती, मेलघाट, पुणे, यवतमाल, चंद्रपुर औऱ गढ़चिरोली में 12 प्रादेशिक वन विभाग के कार्यालय है. शहर में करीब 4000 प्राकृतिक और कृत्रिम जलाशय हैं. सभी जलाशयों पर मचान बनाए गए हैं. मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प में सर्वाधिक 860 जलाशय हैं. इसमें 500 प्राकृतिक और 360 जलाशय हैं. वन क्षेत्र में सभी तरह के वन्य प्राणी इन जलाशयों का इस्तेमाल करते हैं.
गांव, शहरों तक पानी की तलाश
गर्मी के बढ़ने के साथ ही इन जलाशयों में पानी का स्तर भी कम होता जाता है. इसके चलते वन्य प्राणी पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगते हैं. कई दफा तो वे गांवों और शहरों तक पानी की तलाश में निकल पडते हैं. ऐसी स्थिति में मानव मात्र से वन्य प्राणियों को खतरा हो सकता है. इस पर रोक लगाने की दृष्टि से जरूरी है कि प्राकृतिक जलाशयों में पानी कम न होने पाए. ऐसा हुआ तो उन्हें पानी के लिए जगह-जगह भटकना नहीं पड़ेगा.
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